वैज्ञानिकों ने अरबों साल पुराने रहस्य से उठाया पर्दा, जानिए कैसे हुआ था चांद का निर्माण?

सालों से वैज्ञानिक चांद का निर्माण कैसे हुआ यह जानने के लिए शोध कर रहे हैं। अब एक नए शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि लगभग 4 अरब साल पहले धरती पर एक ग्रह के गिरने के चांद का निर्माण हुआ था। शोधकर्ताओं ने रहस्यमयी, घने और महाद्वीप के आकार के दो गोलों के सिद्धांत का जिक्र किया है। उनका कहना है यह दोनों गोले धरती के मेंटल के अंदर 2900 किमी नीचे दबे हैं। अगर वैज्ञानिकों का यह दावा सच साबित होता है, तो वे ठीक दिशा में जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सालों से चले आ रहे इस रहस्य का खुलासा कर दिया है।
लगभग एक दशक से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश में लगे थे कि आखिरकार चांद का निर्माण कैसे हुआ। अब इस नए शोध में जानकारी मिली है कि दो विशाल गोले धरती के मेंटल में अफ्रीका और प्रशांत महासागर के नीचे दबे हैं। जर्नल नेचर में इस शोध को प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि हो सकता है कि यह गोले एक ग्रह के अवशेष हों, जो सोलर सिस्टम के शुरुआती दौर में धरती पर गिरा था। उन्होंने आगे बताया है कि यह कथित ग्रह धरती पर गिरा, तो बड़े स्तर पर मलबे की बारिश हुई जिससे चांद का निर्माण हुआ।
धरती के नीचे मौजूद है ग्रह का टुकड़ा
धरती पर ग्रह के गिरने का सिद्धांत काफी पुराना है। पहले के शोध में जानकारी मिली है कि करीब साढ़े 4 अरब साल पहले ग्रह के आकार का ऑब्जेक्ट थिया धरती पर गिरा था। इसमें बताया गया है कुछ मलबा इकट्ठा हो गया जिससे चंद्रमा का निर्माण हुआ।
चीन, अमेरिका और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं को नए शोध में इस बात के सबूत मिले हैं कि थिया ग्रह का एक बड़ा हिस्सा धरती के नीचे मौजूद है। शोधकर्ताओं ने बताया कि धरती के आंतरिक हिस्से की भूकंपीय तस्वीरों से पता चला है कि दो महाद्वीप के आकार के गोले मौजूद हैं।
यह गोले धरती के मेंटल के सबसे नीचले भाग में स्थित हैं। इन वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन का इस्तेमाल कर उस जगह के बारे में पता लगाने की कोशिश की जहां पर टक्कर हुई थी।
चीन के वैज्ञानिक होंगपिंग देंग का कहना है कि खोज से उस परंपरागत मान्यता को चुनौती मिलती है जिसमें कहा गया था कि इस विशाल टक्कर से शुरुआती धरती का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि चांद के निर्माण के अलावा धरती के मेंटल में पाई जाने वाली विजातीयता का भी जन्म इसी से हुआ। उन्होंने कहा कि थिया ग्रह का भाग अभी भी धरती के मेंटल में स्थित है।





