क्या अपने कभी सोचा हैं रोलेक्स की घड़ी इतनी महंगी क्यों..?, इसके पीछे छुपा हैं ये गहरा राज

दुनिया भर में रोलेक्स घड़िया अपनी कीमतों के लिए जानी जाती हैं। इन घड़ियों को हस्तियों के रसूख में इजाफा करने के लिए स्टेटस सिंबल के बतौर पहना जाता है। लेकिन बहुत से लोग ये सोचते हैं कि समय तो एक आम घड़ी भी दिखाती है तो फिर रोलेक्स की घड़ी इतनी महंगी क्यों है..? क्या आप इसका कारण जानते हैं..? अगर आप इसकी असल वजह जान लेंगे तो आपको जरूर हैरानी होगी।
दरअसल, रोलेक्स घड़ियां अपनी खास कारीगरी के लिए जानी जाती हैं। इसे ऐसे अनोखे तरीके से तैयार किया जाता है कि इसकी कीमत लाखों में जा पहुंचती है। तभी तो यह घड़ी इतनी महंगी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये घड़ी इतनी महंगी क्यों होती हैं? दरअसल, कंपनी का दावा है कि रोलेक्स घड़ियां साधारण नहीं हैं। कंपनी ने इनके प्रोडक्शन के लिए अलग से एक रिचर्स एंड डिवेलपमेंट लैब बनाई है।
इस लैब में घड़ियों पर इतनी बारीकी से काम होता है जो दुनिया में शायद ही कहीं ओर होता हो। लैब एक से बढ़कर एक उपकरणों से लैस है, जबकि यहां काम करने वाले पेशेवर कारीगर इसमें काम करते हैं। इस आधार पर रोलेक्स के कारीगर घड़ियों को डिजाइन भी करते हैं। रोलेक्स मैकेनिकल घड़ियां बनाती है। मैकेनिकल घड़ियां यानी जिनमें मशीनरी का भरपूर इस्तेमाल होता है। कंपनी का कहना है कि ऐसी घड़ियां बनाना आसाम काम नहीं है, इसलिए बाजार में इनकी कीमत खुद-ब-खुद बढ़ती जाती है।
पहली दफा 1953 में रोलेक्स बनाई गई थी। सबसे पहले रोलेक्स की सबमैरिनर घड़ी खास तैराकों और गोताखोरों के लिए बनाई गई है। कंपनी दावा करती है कि रोलेक्स की एक घड़ी में इतने बारीक पार्ट्स जुड़े होते हैं कि इनकी गिनती करने वाला भी इन्हें भूल जाएगा।इन्हें बड़ी सावधानी से लगाना पड़ता है क्योंकि घड़ियां बनाते वक्त उनके खराब होने के आसार बहुत ज्यादा होते हैं। बहुत सी घड़ियों की पॉलिश तो हाथ से की जाती है। ज्यादातर पुर्जों को फिट करने के लिए अंतिम आकार भी हाथों से ही दिया जाता है। रोलेक्स में यूज किया जाने वाला मैटेरियल ही इसकी कीमत को बड़ा देता है।
दरअसल, रोलेक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला मैटेरियल काफी महंगा होता है। इनमें 940 एल स्टील का इस्तेमाल होता है, जबकि बाजार में उपलब्ध अन्य घड़ियों में 316 एल स्टील का प्रयोग इस्तेमाल किया जाता है। इसी से आप इसकी मजबूती का अंदाज लगा सकते हैं। इसके इस्तेमाल से घड़ियां मजबूत और चमकदार बनती हैं। घड़ी के डायल में व्हाइट गोल्ड का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा घड़ी में जिन नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है वो स्पेशल कांच के प्लेटिनम से तैयार किए जाते हैं। इसमें बेजेल सेरेमिक यानी चीनी मिट्टी का भी इस्तेमाल किया जाता है।
ये घड़ियां कम संख्या में बनाई जाती है। घड़ी में एक खास बात ये भी है कि इसे बनाने में सोने और चांदी का इस्तेमाल भी किया जाता है। घड़ी बनाने में दोनों मैटल को पिघलाकर बनी चीजों का घड़ियों में इस्तेमाल होता है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि इन घड़ियों का निर्माण स्विटजरलैंड में किया जाता है। इनकी कीमत ज्यादा होने का एक कारण ये भी माना जाता है कि रोलेक्स घड़ी बनाने वाले यहां के कारीगरों की पगार बहुत ज्यादा होती है। यह कंपनी हर वर्ष 8 से 10 लाख कलाई घड़ियां बनाती है।





