हरियाणा: स्मॉग बढ़ने के साथ दमा व अस्थमा के मरीजों की भी बढ़ी परेशानी, रहे सावधान!

पिछले कई दिनों से गोहाना, दिल्ली और एनसीआर में धुंए की चादर सी छाई हुई है जिससे आंखों में जलन और सांस के रोगियों की सांस फूलने लगती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी दमा व अस्थमा के मरीजों को हो रही है। जहां गोहाना के खानपुर कलां स्थित बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200-250 मरीज दमा व अस्थमा के पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार स्मॉग की वजह से जहरीली हवा लोगों के फेफड़ों में पहुंच रही है। ऐसा ही रहा तो सेहत के लिए यह बहुत खतरनाक होगा। जो अस्थमा व दमा के मरीज हैं, वे अपनी दवा साथ रखे और दिक्कत होते ही दवा लें। उन्होंने बताया कि आमतौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ गहरी परत बना लेते हैं। सर्दियों के दौरान ट्रैफिक और तापमान के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा की गति कम होती है। यह धुआं और धुंध को एक जगह स्थिर होकर स्मॉग को बनाती है और धरती के समीप जहां लोग सांस ले रहे हैं, वहां अधिक प्रदूषण को बढ़ा देती है। इससे दृश्यता बाधित होती है और पर्यावरण को भी अस्त-व्यस्त कर देती है।
डॉ. आनंद अग्रवाल ने बताया कि स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। ऐसे लोगों को स्मॉग के दौरान घर से निकलने से बचना चाहिए। यह अस्थमा, साइनस और एलर्जी वालों मरीजों के लिए उत्प्रेरक का काम करती है। ये कण फेफड़े में चले जाते हैं। इसके लिए प्रदूषण भी काफी हद तक जिम्मेदार है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह हैं। इस तरह के मौसम में नए वायरस फैल जाते हैं, जो लोगों को कई तरह की बीमारियां देते हैं।
ये बरतें सावधानियां
- अल सुबह और शाम के समय टहलने से बचें।
- कमरे में एग्जॉस्ट चलाएं।
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें।
- रुमाल की दो लेयर बनाकर उसे पानी में गिला कर मुंह पर रखें।
- पेय पदार्थ ज्यादा लें।
- खासकर गर्म पेय पदार्थ।
- घरों की खिड़कियां या दरवाजे बंद रखें।
- कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें।
- धूम्रपान को ना कहें।
- बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें। हो सके तो भाप लें।
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और नियमित लें।





