नगालैंड: गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने वाले बिल के खिलाफ उठी आवाज़
नगालैंड में बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार चला रहे मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने मोदी सरकार की तरफ से लाए जा रहे नागरिकता (संशोधन) विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि नगा लोगों के हितों के खिलाफ जाने वाले इस विधेयक के प्रावधान का राज्य मंत्रिमंडल विरोध करेगी.
नगालैंड सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक में मुख्यमंत्री रियो ने कहा कि कैबिनेट में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की गई और कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 371(A) के जरिये मिली स्वायत्तता और इनरलाइन परमिट के जरिये नगालैंड के हित सुरक्षित हैं. रियो ने कहा, ‘मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान फैसला किया गया कि अगर प्रस्तावित संशोधित विधेयक नगा लोगों के हितों के खिलाफ हुआ तो, राज्य सरकार इसका विरोध करेगी और मामले को केंद्र के समक्ष उठाएगी.’
गृह मंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से 15 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश किए गए नागरिकता (संशोधन) विधेयक का नगालैंड के अलावा असम सहित उत्तर पूर्व के कई राज्यों में विरोध हो रहा है. यहां नगालैंड जनजातीय परिषद और जेडीयू की नगालैंड इकाई इस बिल के खिलाफ मोर्चा खोले हैं.
क्या है नागरिकता (संशोधन) विधायक?
दरअसल नागिरकता (संशोधन) विधेयक 1955 के उस ‘नागरिकता अधिनियम’ में बदलाव के लिए लाया गया था, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय होती है. मौजूदा कानून कहता है कि किसी भी ‘अवैध प्रवासी’ को भारतीय नागरिकता नहीं दी जा सकती. हालांकि अब इस संशोधन विधेयक में उन गैर-मुस्लिमों यानी हिंदू, सिख, बौध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है, जो अत्याचार के कारण अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भागकर भारत आए हैं.
उत्तर-पूर्व में क्यों हो रहा विरोध
वहीं इस नए बिल को लेकर उत्तर पूर्व के मूल निवासी इसे 1971 के बाद बांग्लादेश से पलायन कर भारत आए हिंदुओं को वैधता प्रदान करने के कदम के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस विवाद होता देख यह भरोसा दिलाया था कि लोगों को प्रस्तावित कानून को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए और सभी हितधारकों से विचार-विमर्श करने के बाद ही आगे कदम उठाए जाएंगे.





