जर्मन होमियो नहीं, आदर्श है, डॉ आदर्श त्रिपाठी का दवाखाना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डॉ आदर्श त्रिपाठी द्वारा होम्योपैथिक क्षेत्र में मानवता की सेवा करने का जो संकल्प लिया है उससे उन्होंने रोगियों का जो विश्वास जीता है उसके चलते रोगी और उनके परिजन डॉ आदर्श त्रिपाठी को भगवान का दर्जा देते हैं। व्यावसायिकता के इस दौर में डॉ आदर्श त्रिपाठी के दवाखाने में एक अनार सौ बीमार की कहावत का उल्टा असर दिखता है, उनके करिश्माई हाथों की ताकत से एक अनार भी सौ बीमार के लिए कारगर सिद्ध होता है, ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन, आईना की टीम ने डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी की बढ़ती लोकप्रियता और समाज सेवा के संकल्पित लक्ष्य को समझने, परखने के लिए आकस्मिक निरीक्षण उनके दवाखाने पर किया गया तो वहां रोगियों की भीड़ से बातचीत करने पर डॉक्टर आदर्श के व्यक्तित्व को करीब से समझने का मौका मिला।

एक तरफ जहां हर पेशे में व्यवसायिकता हावी हो रही है वहीं डॉक्टर आदर्श मानवता की सेवा को ही अपना संकल्प मानकर निःस्वार्थ भाव से रोगियों की सेवा कर रहे हैं, एक कुशल चिकित्सक के दवाखाने पहुंचने पर आईना के सदस्यों द्वारा डॉक्टर आदर्श को अपनी बीमारियों से अवगत कराने की जरूरत ही नहीं महसूस हुई, डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी की अनुभवी आंखों ने आईना दिखाती कलमकारों की टीम को स्वस्थ शरीर रहेगा तो स्वस्थ ख़बर बनाये जाने की नसीहत देते हुए सभी सदस्यों के रोगों के निदान के लिए उपहार स्वरूप दवाएं उपलब्ध करायी गयी और अपनी आधुनिक जादुई मशीन के संयंत्र को नाड़ी पर रखते हुए डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी द्वारा जिस तरह किसी भी रोग को अपने अनुभव से पकड़ लेते हैं उसके बारे मे बताया कि कलमकार जिस तरह अपनी पैनी निगाहों से खबर तलाश लेते है ये मशीन भी उनके लिए इंसानी जिस्म में रोगों की तलाश करने में कारगर साबित होती है।

एक बार रोग मिल जाये तो खबर के असर की तरह डॉ आदर्श रोगीयों के इलाज के लिए तक तक लगे रहते है जब तक उनके इलाज का असर न दिखे और यही विश्वास उनकी सफ़लता का मापदंड है जिससे उनको संतुष्टि मिलती है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों के सामने भी विपरीत परिस्थितियां आती हैं जिसपर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए, डॉक्टर समाज के लिए समर्पित है तो सरकार को भी उनके समर्पण, त्याग को देखते हुए विशेष आर्थिक सुविधाएं हेतु नगर निगम, जल कल, विद्युत विभाग आदि से विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में मरीजों की जांच के लिए नए उपकरण व नई तकनीक आ गई है जिससे रोग की पहचान आसान हुई है, लेकिन उपचार की चुनौतियां भी बढ़ी हैं, जिससे असमय कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन किसी भी विपरीत परिस्थितियों में वे विचलित नहीं होते। उनके लिए सेवा भावना ही सर्वोपरी है और उनके उपचार से रोगी ठीक हों और रोगियों का भरोसा उन पर कायम रहे है औए अपने इसी कर्तव्य के चलते जब कोई स्वस्थ होकर उनको दुआ देता है, तो यह उनके लिए सबसे बड़ी दौलत के रूप में होता है।

डॉ आदर्श द्वारा गरीबों और असहाय लोगों के लिए लगातार निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाता है और भले ही दवाखाने में बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है लेकिन रोगियों का विश्वास और डॉ आदर्श का रोगियों को समुचित इलाज दिया जाना ही लक्ष्य दिखाई देता है।

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