बार-बार होता था पीलिया, जब सीटी स्कैन के बाद ऑपरेशन जो निकला देखकर आ जायेगी घिन्न

दिल्ली की एक महिला बार-बार पीलिया होने से बहुत परेशान थी। वह सिटी स्कैन कराने डॉक्टर के पास गई जिसके बाद उसका ऑपरेशन भी हुआ फिर उसके पित्त वाहिक से कुछ ऐसा निकला जिसे देखकर आपको घिन्न भी आ सकती है।
क्या आपने कभी गोल कृमी के बारे में सुना है। चिकित्सीय जगत में इसे राउंड वार्म भी कहते हैं। आमतौर पर मिट्टी या त्वचा के जरिए यह मनुष्य की आंत तक पहुंचते हैं और धीरे धीरे शरीर के अंदर अपनी संख्या कई गुना ज्यादा कर लेते हैं। बाहर से दिखने में ये एक तरह के केंचुल समान दिखाई देते हैं। दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ऐसी ही महिला की जान बचाई है, जिसकी पित्त वाहिका में 14 गोल कृमी जिंदा अवस्था में पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि आमतौर पर आंत में कई केस इस तरह के सामने आते हैं। लेकिन पित्त वाहिका तक पहुंचने के मामले बहुत कम हैं।अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद खुराना ने बताया कि कुछ वक्त पहले 38 वर्षीय महिला सुनीता पेट में दर्द की तकलीफ को लेकर अस्पताल आईं थीं। उन्हें बार बार पीलिया की शिकायत भी थी। सीटी स्कैन किया गया तो देखने को मिला कि सुनीता की पित्त वाहिक (बाइल डक्ट जो लिवर को आंतों से जोड़ती है) में कृमियों की मौजूदगी का पता चला। तब मरीज की एंडोस्कोपिक प्रक्रिया (ईआरसीपी) की गई जिससे वाहिका में कई गोल कृमियों का पता चला, हर कृमि का आकार करीब 15 से 20 से.मी. था। उन्होंने बताया कि आंतों में कृमियों का पाया जाना आम है लेकिन बाइल डक्ट में ये अमूमन नहीं पाए जाते। भारत में कृमियों के मामले आम हैं क्योंकि डीवर्मिंग के लिए दवाएं लेना आम नहीं है।
उन्होंने बताया कि बहुत कम ऐसा होता है कि कृमी पित्त वाहिका में प्रवेश करते हैं जिसकी वजह से दर्द, बुखार और पीलिया (जॉन्डिस) की समस्या पैदा होती है। कुछ मामलों में वाहिका के अंदर दो से तीन गोल कृमियों की मौजूदगी देखी गई है। लेकिन 14 एकसाथ पहली बार देखने को मिले हैं। उन्होंने ये भी बताया कि लंबी चर्चा के बाद मरीज का बगैर सर्जरी एंडोस्कोपी की मदद से कृमियों को बाहर निकाला गया। बहरहाल मरीज को अब पेट में दर्द की तकलीफ के साथ अन्य परेशानियां धीरे धीरे कम हो रही हैं।





