साउथ कोरिया: पूर्व प्रेसिडेंट को भ्रष्‍टाचार के आरोप में 24 साल की जेल

साउथ कोरिया की पहली महिला प्रेसिडेंट पार्क ग्युन-हे को अदालत ने उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग समेत भ्रष्टाचार के 16 मामलों में आरोपी बनाने के बाद दोषी ठहराते हुए 24 साल की सजा सुनाई है. जबकि अभियोजन पक्ष ने 30 साल की सजा की मांग की. कोर्ट ने शुक्रवार को दक्षिण कोरिया की पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्युन-हे को एक व्यापक भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोपों में दोषी ठहराते हुए यहसजा सुनाई है. साथ ही, उन पर 18 अरब वॉन का जुर्माना भी लगाया गया है. भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते ही 2017 में उन्हें अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी.

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टीवी पर सजा का लाइव प्रसारण
समाचार एजेंसी ‘योनहाप’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत की सुनवाई का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया गया. सुनवाई के दौरान सियोल के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा 66 वर्षीया पूर्व राष्ट्रपति को दोषी ठहराया गया. करीब एक साल पहले मार्च 2017 में उनको गिरफ्तार किया गया था.

रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार समेत16 मामलों में आरोपी
पार्क को रिश्वतखोरी, उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग समेत भ्रष्टाचार के 16 मामलों में अभियुक्त ठहराया गया. न्यायाधीश ने कहा, “राष्ट्रपति ने जनता द्वारा दी गई शक्ति का दुरुपयोग किया, इसलिए उनको सख्त सजा की जरूरत है, ताकि देश के भावी नेताओं को कड़ा संदेश मिले.”

समर्थक कर रहे थे रिहाई की
अभियोजकों ने पार्क के लिए 30 साल की सजा की मांग की थी. अदालत के बाहर लगे बड़े परदे पर मामले में फैसले को देखने के लिए पार्क के सैकड़ों समर्थक इकट्ठा थे. वे कोरिया और अमेरिका के झंडे लहराते हुए पार्क को मुक्त करने की मांग कर रहे थे.

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पहली महिला प्रेसिडेंट थी
पार्क साल 2013 में दक्षिण कोरिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं. वह पहली निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष थीं, जिन्हें पद से बेदखल कर दिया गया. इसके अलावा वह तीसरी दक्षिण कोरियाई नेता हैं, जिनको भ्रष्टाचार के मामले में अभियुक्त करार दिया गया है.

घोटाले पर महाअभियोग
घोटाले के कारण पार्क पर संसद में दिसंबर 2016 में महाभियोग चलाया गया और उन्हें औपचारिक तौर पर 10 मार्च, 2017 को संवैधानिक पद से हटाया गया.

कोर्ट का किया था बहिष्‍कार
पार्क शुक्रवार को सजा तय करने के लिए की गई सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद नहीं थीं. पार्क ने अक्टूबर में छह महीने कैद की अवधि में विस्तार किए जाने के आदेश का विरोध करते हुए अदालती सुनवाई का बहिष्कार किया था.उन पर अपनी पुरानी मित्र व विश्वासपात्र चोई सून-सिल की मिलीभगत से राजनीतिक पक्षपात के बदले में कारोबारियों पर रिश्वत देने के लिए दबाव डालने का आरोप था. 

 
 
 

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