कर्ज माफी के लिए ‘क्रांति’ से 10 KM तक सिर्फ किसानों का रैला, पूरे शहर में रहा जाम

  • सीकर.कर्ज माफी के लिए चार दिन से शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे सीकर जिले के किसानों ने ‘क्रांति’ की पहली झलक दिखा दी। ये सीकर के वे ही किसान हैं, जो 70 साल में आठ बड़े किसान आंदोलनों काे सफल बना चुके हैं। इस बार का आंदोलन भी इसी राह पर चल पड़ा है। कृषि मंडी में महापड़ाव कर रहे किसान सोमवार को सड़क पर उतर आए। करीब 10 किमी के दायरे में सिर्फ किसान थे। पूरा शहर तीन घंटे जाम रहा। आक्रोश रैली में मौजूद हर किसान की आंख में गुस्सा था। 
    कर्ज माफी के लिए ‘क्रांति’ से 10 KM तक सिर्फ किसानों का रैला, पूरे शहर में रहा जाम

    रैली की खास बातें…

    – सोमवार दोपहर 12:45 बजे सीकर कृषि उपज मंडी स्थित महापड़ाव स्थल से अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरा राम व प्रदेश अध्यक्ष पेमा राम के नेतृत्व में सीएम के पुतले की शव यात्रा निकाली।
    – 10 किमी के दायरे में रैली शहर के सभी प्रमुख मार्गों से निकली। दुकानदारों ने बाहर रखा सामान समेट लिया। जयपुर रोड, स्टेशन रोड, सांवली रोड, बस डिपो तिराहा, कल्याण सर्किल, कलेक्ट्रेट, सालासर रोड, जाट बाजार, सहित मुख्य मांगों पर बड़ी संख्या में वाहन जाम में फंसे रहे।
    – पुतले की शव यात्रा जाट बाजार तक निकाली गई। जाट बाजार सर्किल पर पुतले का दहन किया गया। पटाखे जलाकर आक्रोश जताया। प्रदर्शन 3.45 बजे तक चला। इसके बाद पड़ाव स्थल पहुंचकर किसानों ने रणनीति तय की।

    ये क्रांति कैसे?

    राजनीति शास्त्र में क्रांति की अलग-अलग परिभाषाएं हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा प्रचलित है ये ही कि ‘व्यवस्था के खिलाफ जनआंदोलन।’ कुछ वैश्विक हो सकते हैं, जबकि अन्य एक ही देश तक सीमित होती हैं, जिसमें हितों के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़े।
    कर के संदर्भ में : सीकर में अब तक के आठ जनआंदोलन बड़े वर्ग के हित के लिए हुए जो बाद में प्रदेशभर के लिए मददगार हुए। इस बार भी सीकर के प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यह क्रांति ही है।
    ऐसा पहली बार हुआ है कि सीकर जिला मुख्यालय पर किसान चार दिन से महापड़ाव डालकर बैठे हैं।
    अनुशासन :किसानों ने की चालकों से समझाइश, व्यवस्थाएं खुद संभाली रैली में शामिल हुए सभी किसान अनुशासन में रहे। तीन घंटे तक शहर में किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी व प्रदर्शन किया। लेकिन, मार्गों पर आने वाले वाहनों को समझाइश से ही दूर किया। खुद किसानों ने ही रास्तों में पुलिस के साथ अगुवानी की। आवारा पशुओं को दूर किया। जलपान की व्यवस्था भी किसानों ने टैंकरों के जरिये खुद की।

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    समर्थन : व्यापारियों ने की भोजन की व्यवस्था

    महापड़ाव पर बैठे किसानों के समर्थन में सोमवार को अनेक संगठनों के साथ व्यापारी भी आ गए। सीकर कृषि उपज मंडी खाद्य व्यापार संघ अध्यक्ष नवरंग खीचड़ व अनाज कारोबारी महावीर प्रसाद जैन लालास ने पड़ाव स्थल पर बैठे किसानों को सुबह का भोजन कराया। वहीं मंडी में पड़ाव स्थल पर पहुंचकर पशु व्यापारियों ने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया।

    हमारे किसानों को हल्के में लेने वालों के लिए जानना जरूरी

    अंग्रेजों को भी झुका दिया था

    1935 : जागीरदार अत्याचार पर तुले थे। किसानों ने जागीरदारों व अंग्रेज अफसर कर्नल वैब को झुकाया। किशोरी देवी के नेतृत्व में आंदोलन हुआ। लगान रोकना ही पड़ा।
    1938 : गोठड़ा भूकरान की जोहड़ी में अत्याचार और लगान माफी को लेकर 12 सितंबर 1938 में किसान एकजुट हुए। आंदोलन में 500 से ज्यादा महिलाएं थी। तत्कालीन जयपुर महाराजा से किसान नेता सर छोटू राम अड़ गए। बाद में लगान माफ हुआ।
    1951: किसानों को शहरी क्षेत्रों में घुसने पर टोल चुकाना पड़ता था। सन 1951-52 में लंबा आंदोलन चला। राव राजा झुके। टोल से मुक्ति दी गई।
    1968: सरकार 1968 तक बाजरा पर लेवी के नाम से टैक्स लेती थी। आंदोलन के बाद प्रदेशभर में लेवी से मुक्ति मिल गई।
    1987 : वर्ष 1987 में सरकार ने बिजली की दर पांच पैसे बढ़ा दी। बाद में बिजली दर वापस हुई।
    1997: 13 दिन तक अमरूदों का बाग जयपुर में बढ़ी हुई बिजली दरों के विरोध में पड़ाव डाला। दरें घटानी पड़ी।
    2005 : बिजली कंपनियों के विरोध में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया। सरकार ने खुद कंपनियों के द्वारा बढ़ाई गई बिजली दरों को वहन करने का फैसला किया।
    2017 : इसी साल फरवरी में बिजली की बढ़ी हुई दरों के विरोध में आठवां आंदोलन हुआ। सरकार को झुकना पड़ा और बिजली दरों का वापस लेना पड़ा।

    मोदी ने भी माना था

    सीकर के लोगों में चाणक्य बुद्धि, सब पहचान लेते हैं
    सीकर के लोगों में चाणक्य बुद्धि है। अपने भले-बुरे की पहचान कर लेते हैं। औरों को पता चले, उससे पहले ही सीकर के लोग पहचान जाते हैं कि एक साल बाद क्या होने वाला है।
    -नरेंद्र मोदी ने 28 नवंबर 2013 को सीकर में चुनावी रैली में

    अब आगे क्या होगा

    आंदोलन कैसे चलेगा इसकी 15 दिन की रणनीित
    – महापड़ाव डाले बैठे किसान 15 दिन से ज्यादा की तैयारी करके आए हैं। प्रतिदिन किसान नेता आगे के आंदोलन को लेकर उन्हें रणनीति समझा रहे हैं।
    – आंदोलन के तहत गुरुवार को सीकर जिला बंद का आह्वान किया है। कई संगठन भी समर्थन में आगे आए हैं।
    – 800 गांवों के किसानों ने शुक्रवार को रैली निकाल की थी महापड़ाव की शुरुआत।
    – 40,000 बोरी अनाज जुटाया गया है महापड़ाव में शामिल किसानों के भोजन के लिए।

    महिलाएं : रैली में गाए लोक गीत, हर मोर्चे पर आगे

    किसानों ने डीजे पर डांस किया। महिलाएं नाचती हुई तथा गीत गाती हुई रैली के साथ चली। रैली के बाद किसानों का हुजूम किसान महापड़ाव स्थल कृषि उपज मंडी पहुंचा। जहां किसान नेताओं ने आगे की रणनीति तय की।
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