हर पंजाबी को देखनी चाहिए फिल्म ‘सूबेदार जोगिंदर सिंह’ : कैप्टन अमरिंदर सिंह

- in Mainslide, पंजाब, मनोरंजन

चंडीगढ़, 5 अप्रैल.  इस शुक्रवार, 6 अप्रैल को रिलीज हो रही पंजाबी फिल्म ‘सूबेदार जोगिंदर सिंह’ हर पंजाबी को देखनी चाहिए। इस फिल्म को परिवार समेत देखने के पीछे कई कारण हैं। यह फिल्म मात्र मनोरंजन के लिए ही नहीं बल्कि पंजाब के असल शूरवीरों की जिंदगी पर रौशनी डालने के लिए भी है।

फिल्म ‘सूबेदार जोगिंदर सिंह’

इस फिल्म को पंजाबी सिनेमा की इतिहास की पहली फिल्म कहा जा सकता है, जो किसी पंजाबी सैनिक की जिंदगी पर बनी है। यह फिल्म पूरे देश के सैनिकों के लिए गर्व वाली बात है कि उनकी जिंदगी, दुशवारियां, समस्यायों व पारिवारिक हालातों को यह फिल्म आम लोगों तक पहुंचाने जा रही है। यह फिल्म बताऐगी कि पंजाबी कौम को बहादुर कौम क्यों कहा जाता है। यह फिल्म दिखाऐगी कि बातें करने व सरहद पर दुश्मनों का मुकाबला करने में क्या अंतर है।

यह फिल्म बताऐगी कि फिल्म बनाना कोई आसान कार्य नहीं है, दर्शकों को हकीकत से रुबरु करने के लिए कई बार जिंदगी भी दांव पर लगानी पड़ती है। यह फिल्म पंजाब के मान में ओर बढ़ौतरी करती हुई सैनिक परिवारों प्रति आम लोगों के मनों में ओर सतिकार पैदा करेगी। निर्माता सुति सिंह व निर्देशक सिमरजीत सिंह की यह फिल्म सूबेदार जोगिंदर सिंह के एक आम लडक़े से सैनिक अधिकारी बनने तक व बाद में सरहद पर दुश्मनों का मुकाबला करते हुए शहीदी पाने तक की दास्तां को पर्दे पर पेश करती है। फिल्म में सरहद का तनाव भरा माहौल भी है व पुरातन पंजाब के रंग भी।

सूबेदार जोगिंदर सिंह

वर्णनीय है कि सूबेदार जोगिंदर सिंह वह बहादुर सैनिक अधिकारी थे, जिन्होंने वर्ष 1962 में देश की पहली सिक्ख रैजीमैंट के मात्र 25 जवानों के साथ मिल कर चाईना के करीब 1 हजार सैनिकों का डट कर मुकाबला किया था। पंजाबी के दर्जन से भी ज्यादा नामवर कलाकारों की अदाकारी वाली यह फिल्म एक ही समय पर पूरी दुनिया में पंजाबी व हिंदी भाषाओं  में रिलीज हो रही है।

 

You may also like

अपने जीन्स में मौजूद कैंसर के खतरे से अनजान हैं 80 फीसदी लोग

दुनिया भर में कैंसर के मामलों में तेजी