‘युद्ध वाली देवी’ नाम से फेमस है मंदिर, इसलिए पाक आर्मी भी सर झुकाती है यहां

जोधपुर.राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को परास्त करने में तनोट माता को बहुत माना जाता है। यहां ये मान्यता है कि माता ने सैनिकों की मदद की और पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा था। यह मंदिर जैसलमेर से थार रेगिस्तान में 120 किमी. दूर सीमा के पास स्थित है तनोट माता का सिद्ध मंदिर। यह मंदिर भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के फौजियों के लिये भी आस्था का केन्द्र रहा है। आज नवरात्र के मौके पर एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहा है जिस पर दुश्मन द्वारा दागे गए गोले भी मंदिर को रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचा पाए थे।
'युद्ध वाली देवी' नाम से फेमस है मंदिर, इसलिए पाक आर्मी भी सर झुकाती है यहां

लगभग 3000 तोप के गोले दागे थे पाकिस्तान ने…

– मंदिर को बीएसएफ ने अपने नियंत्रण में ले लिया। आज यहां का सारा प्रबन्ध सीमा सुरक्षा बल के हाथों में है।
– माता का मंदिर जो अब तक सुरक्षा बलों का कवच बना रहा, शान्ति होने पर सुरक्षा बल इसका कवच बन गये।
– मंदिर के अन्दर ही एक संग्रहालय है जिसमें वे गोले भी रखे हुए हैं। पुजारी भी सैनिक ही है। सुबह-शाम आरती होती है।
– मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक रक्षक तैनात रहता है, लेकिन प्रवेश करने से किसी को रोका नहीं जाता।
– फोटो खींचने पर भी कोई पाबंदी नहीं। इस मंदिर की ख्याति को हिंदी फिल्म ‘बॉर्डर’ की पटकथा में भी शामिल किया गया था।

बार्डर मूवी में भी इसका जिक्र किया गया है…

-17 से 19 नवंबर 1965 को शत्रु ने तीन अलग-अलग दिशाओं से तनोट पर भारी आक्रमण किया था।
– दुश्मन के तोपखाने जबर्दस्त आग उगलते रहे और तनोट की रक्षा के लिए मेजर जय सिंह की कमांड में 13 ग्रेनेडियर की एक कंपनी और सीमा सुरक्षा बल की दो कंपनियां दुश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थी।

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– इस घटना की याद में तनोट माता मंदिर के संग्रहालय में आज भी पाकिस्तान द्वारा दागे गये जीवित बम रखे हुए हैं।
– 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना कि तरफ से गिराए गए बम भी इस मंदिर पर खरोच तक नहीं ला सके, यहां तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे तक नहीं।
– जब भारतीय सेना उन पर हावी हो गई, उन्होंने जवाबी आक्रमण किया जिससे पाकिस्तानी सेना को भयंकर नुकसान हुआ और वे पीछे लौट गयी।

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