कश्मीर में परवाज भर रहे प्रवासी पक्षी, शिकारियों ने बिछाया जाल

कश्मीर में प्रवासी पक्षियों के अवैध शिकार पर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को श्रीनगर में कई जगह छापेमारी कर एक शिकारी को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से एक शॉटगन भी बरामद हुई है। बता दें कि बीत एक महीने में घाटी में लगभग 4 लाख प्रवासी पक्षी आ चुके हैं। इनकी सुरक्षा के लिए वन्य जीव विभाग सक्रिय हो गया है।

दुनियाभर से कश्मीर पहुंच रहे ‘मेहमानों’ की सुरक्षा के लिए वन्य जीव विभाग सक्रिय हो गया है। मेहमानों पर कोई टेढ़ी नजर न डाले और उनके रैन बसेरे में खलल न पड़े, इसके लिए पुलिस और स्थानीय लोगों के साथ मजहबी नेताओं की मदद भी ली जा रही है।

अगर कोई मेहमानों को तंग करते या उनकी जान जोखिम में डालता नजर आता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जहां भी यह मेहमान ठहरे हैं, वहां निगरानी के लिए विशेष दल तैनात किए जा रहे हैं। यह मेहमान कोई और नहीं बल्कि पंख पखेरू हैं, जो यूरोप, साइबेरिया, चीन समेत विभिन्न देशों से कश्मीर की सर्दी का आनंद लेने आ रहे हैं।

घाटी में आ चुके है चार लाख प्रवासी पक्षी
बीते एक माह के दौरान घाटी के विभिन्न पक्षी विहारों में लगभग चार लाख प्रवासी पक्षी आ चुके हैं और इनका आगमन जारी है। इन प्रवासी पक्षियों में टील, मैलार्ड, कूट, शोवलर, पोचार्ड, पिंटेल, काली गर्दन वाला सारस जैसे कई पक्षी नवंबर से फरवरी तक कश्मीर में ही रहना पसंद करते हैं।

पुलिस ने एक शिकारी को किया गिरफ्तार
इसी बीच, प्रवासी पक्षियों के शिकार के कुछ वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने मंगलवार को श्रीनगर में कई जगह छापने मारकर एक आरोपित को गिरफ्तार कर उसकी शॉटगन को भी जब्त कर लिया।

कश्मीर में डल झील के अलावा होकरसर, छतलाम, शालबुग, आंचर, वुल्लर समेत विभिन्न पक्षी विहारों में नवंबर के अंतिम सप्ताह से प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा करीब ढाई लाख प्रवासी पक्षी श्रीनगर-बारामुला राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होकरसर वेटलैंड में आकर ठहरते हैं।

उसके बाद वुल्लर और शालबुग में भी ये पक्षी परवाज भर रहे हैं। प्रवासी पक्षियों के आगमन के साथ ही घाटी में शिकारी भी सक्रिय होने लगे हैं। शिकारी अपने मनोरंजन और स्वाद के लिए प्रवासी पक्षियों का शिकार करते हैं। कई प्रवासी पक्षियों को पकड़कर उन्हें बेचते हैं।

बेजुबान परिंदों का नाहक कत्ल गुनाह है। शिकार करना सही नहीं है। हम मजहब की रोशनी में यही लोगों को समझाते हैं। यह जीव दुनियाभर से कश्मीर इसलिए आते हैं कि इन्हें लगता है कि यहां वह हिफाजत से रहेंगे, इन्हें यहां पर्याप्त खुराक मिलेगी। इसलिए हमें इनकी हिफाजत करनी चाहिए।
मौलवी शकील अहमद

इंटरनेट पर शेयर हुआ था शिकार का वीडियो
वन्य जीव संरक्षण विभाग के अधिकारी मोहम्मद अल्ताफ ने बताया कि वुलर झील में कुछ शिकारियों द्वारा मेहमान पक्षियों का शिकार करती कुछ वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित होने के बाद शिकायत दर्ज कर हमने छानबीन शुरू की।

मंगलवार सुबह श्रीनगर के हवल, नूरबाग, पंजीनारा, मलूरा तथा बरथना इलाकों में छापे मारे और हवल क्षेत्र से एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसके कब्जे से एक शॉटगन बरामद की। आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

शॉटगन, पंटगन और देसी राइफलों का प्रयोग करते हैं शिकारी
क्षेत्रीय वाइल्ड लाइफ वार्डन तौहीन अहमद देवा ने कहा कि शिकारी एक बड़ी समस्या हैं और इनसे निपटना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। वन्य जीव विभाग ने संबंधित प्रशासन व पुलिस के माध्यम से ऐसे सभी लोगों को अपने हथियार संबंधित थानों में जमा कराने के लिए कहा है, जो पक्षी विहारों के आसपास रहते हैं।

उन्होंने बताया कि यहां शाटगन, पंटगन और पुरानी राइफलें जिन्हें देसी राइफलें कहा जाता है का ही मुख्यत: शिकारी इस्तेमाल करते हैं। 12 बोर की राइफल भी इस्तेमाल होती है। कुछ जगहों पर शिकारी इन मेहमानों को पकड़ने के लिए जाल भी लगाते हैं।

वन्य जीव विभाग ने मेहमानों की सुरक्षा के लिए स्थानीय लोगों में जागरूकता पैदा करने का एक अभियान चला रखा है। इसके अलावा हमने कुछ कुख्यात शिकारियों को भी चिह्नित किया है। शिकारियों को पकड़ने के लिए गश्ती दल भी बनाए हैं।

उन्हें किश्तियां भी दी गई हैं, ताकि उन्हें वेटलैंड और झील के भीतरी इलाकों में जाने में दिक्कत न हो। कई प्रवासी पक्षियों का यह प्रजनन काल भी है, इसलिए कई जगहों पर सीसीटीवी लगाए गए हैं।

हमने वन्य जीव विभाग के साथ स्कूलों और कॉलेजों के अलावा पक्षी विहारों के आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाए हैं। लोगों को समझाया है कि यह प्रवासी पक्षी हमारे मेहमान हैं, हमारे पर्यावरण संतुलन का अहम हिस्सा हैं। इनका संरक्षण मतलब कश्मीर के पर्यावरण का संरक्षण है।
जरीफ अहमद जरीफ, पर्यावरणविद्

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