कभी यूपी का यह क्रिकेटर खेलता था उधार बैट लेकर, लेकिन आज एक ही पल में बन गया करोड़पति

नोएडा। अंडर-19 विश्वकप क्रिकेट में उम्दा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर-71 के शिवम मावी ने एक बार फिर से शहरवासियों को गर्व करने का मौका दिया है। इस बार इंडियन प्रीमियर लीग(आइपीएल) के लिए हुई क्रिकेटरों की नीलामी में शिवम मावी को कोलकाता नाइट राइडर्स ने तीन करोड़ रुपये में खरीदा है।कभी यूपी का यह क्रिकेटर खेलता था उधार बैट लेकर, लेकिन आज एक ही पल में बन गया करोड़पति

ऑलराउंडर की भूमिका निभाने वाले शिवम ने विश्वकप क्रिकेट में 145 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करके चयनकर्ताओं के भरोसे को मजबूती दी। अब तक वह चार मैचों में 8 विकेट लेकर भारत के श्रेष्ठ गेंदबाजों में शुमार हो चुके हैं। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी ट्वीट करके शिवम की तारीफ की थी। भारत का सेमीफाइनल में अब पाकिस्तान से 30 जनवरी को मुकाबला होना है। मूलरूप से मेरठ (सीना) निवासी शिवम किसान परिवार से हैं। उनके माता-पिता 14 साल पहले रोजगार की तलाश में नोएडा आ गए थे।

परिवार की आर्थिक स्थिति उस वक्त बेहद कमजोर थी। वह अपने साथियों की किट से क्रिकेट खेला करते थे। उनके हुनर को देखकर बाद में परिवार ने भी शिवम का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया। उनका परिवार सेक्टर-71 में दो कमरे के छोटे से फ्लैट में रहता है। वर्ष 2016 में उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था।

इस कारण एक साल तक क्रिकेट से दूर रहे, लेकिन हौसले को गिरने नहीं दिया। सबसे पहले उन्हें अंडर-14 में दिल्ली की टीम से खेलने का मौका मिला। इसमें शानदार प्रदर्शन किया। बावजूद दिल्ली अंडर-16 टीम में चयन नहीं किया गया। इसके बाद शिवम ने इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। चैलेंजर ट्रॉफी में नौ विकेट लेने पर उनका चयन अंडर-19 विश्वकप क्रिकेट के लिए किया गया।

किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं शिवम

मूलरूप से मेरठ(सीना) निवासी शिवम किसान परिवार से हैं। उनके माता-पिता 14 साल पहले रोजगार की तलाश में नोएडा आ गए थे। शिवम को आरंभ में ही क्रिकेट से लगाव हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति उस वक्त बेहद कमजोर थी। वह अपने साथियों की किट से क्रिकेट खेला करते थे। उनके हुनर को देखकर बाद में परिवार ने भी शिवम का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया। फिर शिवम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

फिलहाल वह और उनका परिवार सेक्टर-71 में रहता है। वर्ष 2016 में उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था। इस कारण एक साल तक क्रिकेट से दूर रहे, लेकिन हौसले को गिरने नहीं दिया। पिता पंकज मावी बताते हैं कि शिवम ने अपनी जिंदगी को क्रिकेट मान लिया था। इसलिए वह फिर उठ खड़ा हुआ। चोटग्रस्त होने के बावजूद वह कई बार पैदल ही अपनी एकेडमी में जाता था।

शिवम के साथ कई स्थानीय मुकाबले खेल चुके उत्तम चौधरी बताते हैं कि वह दूसरे के प्रदर्शन से भी उतना ही खुश होता है, जितने अपने प्रदर्शन से। वह एक बार करंट लगने से भी जल गए थे। बावजूद इसके गेंदबाजी नहीं छोड़ी। मां कविता मावी बताती हैं कि हाथ जलने के बाद ऐसा लगा कि वह क्रिकेट नहीं खेल पाएगा, लेकिन भगवान के आशीर्वाद से सब ठीक हो गया। कोलकाता नाइट राइडर्स टीम में चुने जाने के बाद उनके घर पर बधाइयों का तांता लगा रहा।

ऐसे तय किया सफर

सबसे पहले उन्हें अंडर-14 में दिल्ली की टीम से खेलने का मौका मिला। इसमें शानदार प्रदर्शन किया। बावजूद दिल्ली अंडर-16 टीम में चयन नहीं किया गया। ऐसे में प्रशिक्षक फूलचंद शर्मा की राय के बाद वह उत्तर प्रदेश से खेलने लगे। फिर अंडर-19 में उत्तर प्रदेश के लिए कई टूर्नामेंट खेले। इसके बाद शिवम ने इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। चैलेंजर ट्रॉफी में नौ विकेट लेने पर उनका चयन अंडर-19 विश्वकप क्रिकेट के लिए किया गया।

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