पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली में एक माह तक चलने वाले धूल निरोधक अभियान की शुरुआत की..

अभियान आठ जून तक चलेगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान के जरिये गर्मी के मौसम में होने वाले प्रदूषण से दिल्लीवासियों को काफी हद तक राहत मिलेगी। साथ ही यह अभियान पर्यावरण सुधार और प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका निभाएगा।

टीमों का गठन

धूल निरोधक अभियान के तहत दिल्ली में निगरानी को लेकर 13 विभागों की 629 कर्मियों की 235 पेट्रोलिंग टीम दिन और 433 कर्मियों की 165 पेट्रोलिंग टीम रात में तैनाती की गई हैं। ये टीमें 24 घंटे धूल प्रदूषण की निगरानी करने के साथ ही उसे रोकने का काम भी करेंगी। इसकी रिपोर्ट समय-समय पर पर्यावरण विभाग और डीपीसीसी के साथ साझा की जाएगी।

सीएंडडी साइट का पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि निर्माण स्थलों से पैदा होने वाला धूल प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित होता है। इसी दिशा में कार्य करने के लिए निर्माण स्थलों के लिए पोर्टल लांच किया गया था, जिस पर 500 स्क्वायर मीटर से अधिक सभी साइट का स्व-पंजीकरण करना अनिवार्य है। अभी तक 750 साइट का पोर्टल पर पंजीकरण किया जा चुका है।

अभियान के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी सक्रिय सीएंडडी साइट पोर्टल पर पंजीकृत हो जाएं और डीपीसीसी द्वारा पोर्टल पर पंजीकृत सभी पंजीकृत साइट की स्व-आकलन रिपोर्ट की समीक्षा का कार्य किया जाएगा। निर्माण स्थलों पर निर्माण संबंधी 14 नियमों को लागू करना जरूरी है। इसके लिए विभागों को निर्माण स्थलों की लगातार निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

एंटी स्माग गन, एमआरएस, वाटर स्प्रिंकलर की तैनाती

उन्होंने बताया कि धूल प्रदूषण को रोकने के लिए 84 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग (एमआरएस) मशीनों , 609 वाटर स्प्रिंकलर और 185 मोबाइल एंटी-स्माग गन की तैनाती की गई है | धूल प्रदूषण को लेकर पहले केवल 20 हजार वर्ग मीटर से ऊपर के निर्माण स्थलों पर ही एंटी स्माग गन लगाने का नियम था।

नए नियम के आधार पर पांच हजार वर्गमीटर से लेकर उससे अधिक के एरिया के निर्माण साइट पर एंटी स्माग गन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। पांच हजार से 10 हजार वर्ग मीटर तक के निर्माण स्थलों पर एक, 15 हजार वर्ग मीटर के निर्माण स्थलों पर दो, 20 हजार वर्ग मीटर निर्माण स्थलों पर तीन एंटी तैनात होनी चाहिए।

Back to top button