12 साल तक भीख मांगती रही इस नामी आर्मी अफसर की बेटी, कहती रहती है-नहीं करनी शादी
लखनऊ. भाई- बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व भैयादूज 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस खास मौके पर राजधानी लखनऊ में रहने वाले भाई-बहन अरुण और अंजना के बारे में बता रहा है। ये जोड़ी पैरेंट्स की डेथ के बाद सदमे से पागल हो गई थी। दोनों ने खुद को 12 सालों तक अपने घर में कैद रखा। बहन सिर्फ भीख मांगने के लिए घर से निकलती थी, जिससे दोनों के खाने-पीने का इंतजाम होता था।

इलाज के बाद अब दोनों की हालत बेहतर है
– अंजना बताती हैं, “हमारी फैमिली इंदिरा नगर में शालीमार चौराहे के पास रहती थी। तीन भाई-बहनों में मैं दूसरे नंबर पर हूं। 2004 में एक रोड एक्सीडेंट में मम्मी-पापा की डेथ हो गई थी। तब मैं 22 साल की थी। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी में एमए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया ही था, लेकिन उस हादसे के बाद मेरी पढ़ाई छूट गई।”
– “मां-पापा को खोने का सदमा बहुत बड़ा था। मेरी बड़ी बहन जैसे डिप्रेशन में चली गई थी। कुछ दिन बाद उसकी भी डेथ हो गई। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। बचपन में मेरे लिए अलमारी में बिस्कुट छुपाकर रखती थी। अपने तीन करीबियों को खोने के बाद मैंने और भाई ने खुद को अपने घर में जैसे कैद कर लिया।”
– “हम दोनों की लाइफ जैसे वहीं थम गई थी। बस गुमसुम घर में बैठे रहते थे। कुछ समय बाद घर की बिजली-पानी सप्लाई भी कट हो गई। घर जैसे खंडहर में तब्दील हो गया था। उसके बाद हमारी जिंदगी में क्या हुआ, मुझे कुछ याद नहीं। जैसे मेरी मेमोरी से पिछले 12 साल डिलीट हो गए हैं।”
– “मां-पापा को खोने का सदमा बहुत बड़ा था। मेरी बड़ी बहन जैसे डिप्रेशन में चली गई थी। कुछ दिन बाद उसकी भी डेथ हो गई। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। बचपन में मेरे लिए अलमारी में बिस्कुट छुपाकर रखती थी। अपने तीन करीबियों को खोने के बाद मैंने और भाई ने खुद को अपने घर में जैसे कैद कर लिया।”
– “हम दोनों की लाइफ जैसे वहीं थम गई थी। बस गुमसुम घर में बैठे रहते थे। कुछ समय बाद घर की बिजली-पानी सप्लाई भी कट हो गई। घर जैसे खंडहर में तब्दील हो गया था। उसके बाद हमारी जिंदगी में क्या हुआ, मुझे कुछ याद नहीं। जैसे मेरी मेमोरी से पिछले 12 साल डिलीट हो गए हैं।”
भीख मांगते मिली थी अंजना
– उनका इलाज कर रहे डॉ. सुरेश धपोला ने बताया, “अगस्त 2016 में किसी ने अंजना को रोड पर रोते और भीख मांगते देखा था। उसने इसकी सूचना पुलिस को दी और पुलिस दोनों को 26 अगस्त 2016 को निर्वाण हॉस्पिटल ले आई। तब से दोनों यहीं हैं।”
– “जब ये दोनों मुझे पहली बार मिले थे, तब ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। दोनों सिर्फ रोते रहते थे। एक साल के ट्रीटमेंट के बाद दोनों की स्थिति बेहतर हुई है। वे अब पूरी तरह बात करने लगे हैं। अंजना मुझसे कहती है कि अंकल, आप मुझे मेरे घर छोड़ दो, मुझे घर की याद आ रही है। वो मुझे घर ले जाकर बिस्कुट खिलाने का लालच भी देती है। अभी दोनों का इलाज जारी है।”
– “जब ये दोनों मुझे पहली बार मिले थे, तब ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। दोनों सिर्फ रोते रहते थे। एक साल के ट्रीटमेंट के बाद दोनों की स्थिति बेहतर हुई है। वे अब पूरी तरह बात करने लगे हैं। अंजना मुझसे कहती है कि अंकल, आप मुझे मेरे घर छोड़ दो, मुझे घर की याद आ रही है। वो मुझे घर ले जाकर बिस्कुट खिलाने का लालच भी देती है। अभी दोनों का इलाज जारी है।”
इसे भी देखें:- राम रहीम की ये दिवाली रही फीकी, इस बार राम रहीम नहीं कर पाया ये सब, होता रहा बेचैन…
12 साल बाद अंजना ने भाई के कलाई पर बंधा रक्षासूत्र
– डॉक्टर बताते हैं, “ये दोनों सिर्फ घर जाने की रट लगाए हैं, लेकिन इनका घर अभी रहने की कंडीशन में नहीं है। मुझे डर है कि कहीं घर जाने पर वापस दोनों को सदमे का अटैक न पड़ जाए। इलाज अभी जारी है और दोनों हॉस्पिटल में ही रहे हैं।”
– “हमने इस साल रक्षाबंधन पर दोनों को इन्वॉल्व किया। अंजना ने अपने भाई अरुण की कलाई पर लगभग 12 साल बाद राखी बांधकर उसका मुंह मीठा कराया और लम्बी आयु के लिए दुआ मांगी।”
– “हमने इस साल रक्षाबंधन पर दोनों को इन्वॉल्व किया। अंजना ने अपने भाई अरुण की कलाई पर लगभग 12 साल बाद राखी बांधकर उसका मुंह मीठा कराया और लम्बी आयु के लिए दुआ मांगी।”
दोनों को है ये बीमारी
– डॉक्टर बताते हैं- ”अंजना-अरुण को सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी है। ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी के होने पर व्यक्ति की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है। वो ठीक से किसी को भी पहचान नहीं पाता। वो असामान्य हरकतें करना शुरू कर देता है। उसे भीड़-भाड़ में जाने से डर लगता है। वो किसी पर हमला भी कर सकता है। यदि टाइम रहते इस बीमारी का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए तो पेशेंट को ठीक किया जा सकता है। दोनों पहले से काफी ठीक हैं।”
आर्मी ने दी अंजना को जॉब, नहीं करना चाहती शादी
– अंजना और अरुण को अलग-अलग सेंटर्स में रखा गया है। बहन काफी हद तक ठीक हो चुकी है। आर्मी ने बिहेवियर में इंप्रूवमेंट को देखते हुए उसे अपने यहां CSD कैंटीन में जॉब दी है। भाई का इलाज जारी है।”
– “लड़की को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने और बात करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उसे डांस भी सिखाया जाता है। हॉस्पिटल स्टाफ उसे उसके भाई से मिलवाते हैं। वो बस अपने भाई के साथ घर जाना चाहती है।”
– डॉ. धपोल बताते हैं, “मैंने ट्रीटमेंट के दौरान उससे पूछा था अगर मैं उसकी शादी करवा दूं तो क्या वो करेगी? इस पर वो तपाक से कहती है- नहीं, मैं कभी भी शादी नहीं करना चाहती। इसके पीछे क्या वजह है, वो इस पर बात नहीं करती।”
– “लड़की को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने और बात करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उसे डांस भी सिखाया जाता है। हॉस्पिटल स्टाफ उसे उसके भाई से मिलवाते हैं। वो बस अपने भाई के साथ घर जाना चाहती है।”
– डॉ. धपोल बताते हैं, “मैंने ट्रीटमेंट के दौरान उससे पूछा था अगर मैं उसकी शादी करवा दूं तो क्या वो करेगी? इस पर वो तपाक से कहती है- नहीं, मैं कभी भी शादी नहीं करना चाहती। इसके पीछे क्या वजह है, वो इस पर बात नहीं करती।”





