धमकियों के बीच घोड़ी पर निकली दलित की बिंदौरी, पुलिस ने संभाला मोर्चा, चार थानों की फोर्स तैनात

झुंझुनूं जिले के गोविंददासपुरा गांव में दलित दूल्हे की बिंदौरी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। गांव के कुछ युवकों ने दूल्हे और उसके परिवार को घोड़ी पर बैठकर बिंदौरी निकालने से रोकने की धमकी दी थी। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और बिंदौरी पुलिस सुरक्षा में निकाली गई।
घटना मेहाड़ा थाना क्षेत्र की रामपुरा ग्राम पंचायत की है, जहां हाल ही में कुछ सवर्ण जाति के युवकों ने दूल्हे और उसके परिवार को धमकी दी कि वे परंपरागत रूप से घोड़ी पर बैठकर बिंदौरी नहीं निकाल सकते। इस धमकी के बाद दूल्हे के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को शिकायत दी। मामला गंभीर होने के कारण पुलिस तुरंत हरकत में आई और गांव में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया।
धमकी मिलने के बाद पुलिस ने सबसे पहले धमकी देने वाले युवकों को पाबंद किया और गांव में जाकर समझाइश की। हालांकि विरोध की आशंका बनी रहने के कारण प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए और बिंदौरी के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मेहाड़ा, खेतड़ी, खेतड़ी नगर और बबाई थानों की पुलिस को गांव में तैनात किया गया। इसके अलावा पुलिस लाइन से क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) के 60 से अधिक जवान भी सुरक्षा में लगाए गए। बिंदौरी के पूरे मार्ग पर पुलिस बल की मौजूदगी रही ताकि किसी भी तरह की बाधा न आए।
शनिवार शाम को जब दूल्हे की बारात रवाना हुई, उससे पहले गांव में पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसकी बिंदौरी निकाली गई। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण गांव में शांति बनी रही और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। दलित दूल्हे ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार घोड़ी पर बैठकर बिंदौरी निकाली, जिसके बाद बारात नारनौल के शोभापुर के लिए रवाना हुई।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस और प्रशासन का रुख सख्त बना रहा। डीआईजी ने इस मामले पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अभी हम हैं, किसी को डरने की जरूरत नहीं है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। पुलिस अधिकारियों ने भी साफ कर दिया कि जातीय भेदभाव और सामाजिक अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।





