कांग्रेस के पूर्व महासचिव ने राहुल के लिए कहा- नहीं हैं कोई भी गुण और…
अमेठी.कांग्रेस के प्रदेश महासचिव रहे जंग बहादुर सिंह ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। पूर्व मंत्री जंगबहादुर सिंह का नाम यूपी कांग्रेस में कद्दावर नेता के तौर पर शुमार था। अब जबकि उन्होंने अमेठी में बीजेपी के कमल खिलाने का बीड़ा उठाया है तब उनसे कांग्रेस से मोह भंग होने और बीजेपी को गले लगाने पर ख़ास बातचीत की।

Q&A में पढ़ें जंगबहादुर ने क्या दिए जवाब…
Q. आप कांग्रेस में अहम पद पर थे, फिर एकाएक पार्टी को अलविदा क्यों कह दिया?
A. ”ये सही है कि कांग्रेस की ओर से मुझे प्रदेश संगठन में एक अहम ज़िम्मेदारी मिली हुई थी। लेकिन कांग्रेस में चापलूसों को सम्मान मिलता है और वो मैं कर नहीं सकता। इस लिए दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंकने से पहले मैंने खुद फैसला कर लिया।”
Q. ऐसा क्या था जो आपको इस फैसले पर खींच लाया?
A.”दरअसल, अमेठी से लेकर प्रदेश संगठन तक में कुछ चंडाल चौकड़ी है। उनके इशारों पर नाचों तो बेहतर, वरना दस जनपथ तक फुसफुसाहट शुरू हो जाती है। यही नहीं शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात से पहले कार्यकर्ताओं को फीडिंग दी जाती है कि कब और क्या कहना है।”
Q. आपने अपने इस्तीफे में पार्टी नीति पर सवाल उठाए थे, इसका क्या मतलब?
A.”नीति से भटकने का नतीजा सभी देख रहे हैं। जो पार्टी 60 साल तक केंद्र में राज करती रही, आज वो विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा सकती। ये नीति की ख़राबी ही है, जिसके कारण ये दिन देखना पड़ रहा है।”
Q. बीजेपी में ऐसा क्या अच्छा लगा कि आपने इसका ही दामन थामा?
A. ”मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने 60 सालों में जो नहीं हो सका वो कर दिखाया। चीन जैसा शक्तिशाली देश आज भारत के सामने घुटने टेक चुका है। आतंकियों को पनाह देने वाले देश पाकिस्तान को विश्व के मंच मोदी जी ने बेनकाब किया है।”
Q. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के नेतृत्व को आपने कुशल नेतृत्व मानकर पार्टी क्यों ज्वाइन की?
A.”ये खूबी कम लोगों में होती है जो स्मृति जी में है। अमेठी से हारने के बाद भी वो यहां के विकास के लिए चिंतित दिखीं। हमेशा यहां के लोगों को उन्होंने सम्मान और प्यार दिया। इसी से प्रेरित होकर बीजेपी ज्वाइन किया।”
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Q. क्या राहुल गांधी का नेतृत्व आपको कुशल नेतृत्व नहीं लगा?
A. ”राहुल गांधी में नेतृत्व तो दूर विपक्ष के नेता की ज़िम्मेदारी निभाने के भी गुण नहीं हैं। हमें तो ताज्जुब है कि उन्होंने मोदी जी के कुशल नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कह डाला- 6 महीने का समय हमें दे दो हम बेरोज़गारी ख़त्म कर देंगे। जबकि इतने दिन केंद्र में उनकी सरकार रही और वो स्वयं सांसद रहे तब क्यों नहीं कर लिया?”





