बठिंडा. अब नवजात के जन्म लेते ही उसका आधार कार्ड बन जाएगा। इसके लिए उसके माता-पिता को भागदौड़ भी नहीं करनी पड़ेगी। सेहत विभाग बठिंडा ने केेंद्र सरकार की इस योजना पर काम शुरू कर दिया है। बठिंडा के अलावा 12 ब्लाॅकों के सरकारी अस्पतालों में भी यह योजना शुरू कर दी गई है।
चिल्ड्रन विभाग के एसएमओ डाॅ. सतीश गोयल ने बताया कि यह केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत अस्पताल में बच्चे के जन्म लेते ही उसके आधार बनाने की प्रकिया को पूरी करने के लिए दस्तावेज के तौर पर बच्चे के माता-पिता में से एक का आधार कार्ड अनिवार्य होगा।
माता या पिता का आधार कार्ड के साथ बच्चे का आधार कार्ड जोड़ा जाएगा। आधार बनाने वाला कर्मचारी टैबलेट से माता या पिता का अंगूठे का निशान लेगा। 24 घंटे में संबंधित व्यक्ति के मोबाइल पर मैसेज कर एनरॉलमेंट नंबर भेजा जाएगा। एसएमओ डाॅ. गोयल ने बताया कि एनरॉलमेंट नंबर मिलने के बाद माता-पिता अपने बच्चे का आधार कार्ड कहीं से भी निकलवा सकते हैं। शनिवार को सरकारी अस्पताल बठिंडा में एक दर्जन के करीब नवजात बच्चों के आधार कार्ड बनाए गए। फिलहाल यह योजना जिले के 12 ब्लॉकों रामपुरा, गोनियाना, संगत मंडी, तलवंडी साबो, बालियांवाली, नथाना, मौड़ मंडी, रामां मंडी, भुच्चो मंडी, भगताभाईका में शुरू की है।
0 से लेकर 5 साल के बच्चों के आधार भी बनेंगे
उन्होंने कहा कि आधार लिंक जन्म प्रमाणपत्र बनाने को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पूरी तरह से गंभीर है। अब प्रत्येक बच्चे का जन्म के तुरंत बाद ही आधार कार्ड बना दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी में आॅपरेटर यह कार्य करेंगे। इस कार्य के लिए सरकार की तरफ से उन्हें टैबलेट मुहैया करवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के अनुसार 0 से लेकर 5 साल के बच्चों के आधार भी बनाए जाएंगे। बता दें कि पिछले साल यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथाॅरिटी ऑफ इंडिया ने छूट दी थी कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे का भी आधार कार्ड बन सकता है। इससे पहले नियम के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के बच्चे का आधार कार्ड बनाने का प्रावधान नहीं था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि आधार नंबर से बच्चों को चिह्नित किया जा सकता है जिसके बाद नियम में बदलाव किए गए।