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उत्तराखण्ड नगर निकाय चुनाव यदि टलते हैं तो पूरी होती नजर आएगी भाजपा सरकार की मंशा

देहरादून: तो राज्य में नगर निकाय चुनाव को लेकर आखिरकार सरकार की मंशा पूरी होने जा रही है। चुनाव टलने के लिए बने हालात कुछ इसी ओर इशारा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि देशभर में हाल ही में हुए उपचुनाव के नतीजे सत्तारूढ़ भाजपा को सुकून नहीं दे पाए हैं। सरकार और भाजपा की हालिया चिंता शहरी मतदाताओं को इस तरह साधने की है कि उपचुनाव के माहौल का असर पर उन पर न दिखाई दे।उत्तराखण्ड नगर निकाय चुनाव यदि टलते हैं तो पूरी होती नजर आएगी भाजपा सरकार की मंशा

साथ में नए परिसीमन के चलते बदली परिस्थितियों में निकायों में माहौल को सियासी तौर पर ज्यादा मुफीद बनाया जा सके। इस पूरी कवायद के लिए जरूरी वक्त मिलने से सरकार राहत महसूस कर रही है। यह अलग बात है कि अपनी मंशा को पूरी करने को सरकार जिस राह पर आगे बढ़ी, उसमें राज्य निर्वाचन आयोग के साथ मतभेद बढ़ने से किरकिरी के हालात भी बने। 

राज्य की सत्ता संभालने के साथ ही भाजपा सरकार निकाय चुनाव की अपनी पहली बड़ी चुनौती को लेकर खासी सतर्क रही है। शहरी मतदाताओं में सत्तारूढ़ दल का जनाधार बढ़ने का ही नतीजा रहा कि सरकार ने कई नगर निगमों समेत राज्य के 41 नगर निकायों की सीमाओं में विस्तार किया। निकायों में इस सीमा विस्तार और ग्राम पंचायतों का आकार घटने का ग्रामीणों की ओर से विरोध भी हुआ। 

नए परिसीमन के साथ ही नगर निकाय चुनाव कराने की सरकार की मंशा को उस वक्त झटका लगा, जब अदालत ने नए परिसीमन में जन सुनवाई को अपेक्षित तवज्जो देने का फरमान सुनाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने नए परिसीमन से हाथ पीछे तो नहीं खींचे, अलबत्ता जन सुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। इसमें लग रहे वक्त को देखते हुए निकायों के चुनाव तय समय पर कराए जाने को लेकर संशय पैदा होता रहा है। 

इस बीच देशभर में लोकसभा और विधानसभा की सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दीं। अनसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति संगठनों की ओर से भारत बंद को लेकर जिसतरह प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बवाल हुआ, उसे शांत करने के लिए भी सत्तारूढ़ दल को वक्त की दरकार बताई जा रही है। 

दूसरी ओर नए परिसीमन के बाद नए शामिल क्षेत्रों में हालात अनुकूल बनाने की चुनौती से निपटने के लिए सरकार चुनाव आगे खिसकाने को मुफीद मान रही है। चुनाव तय समय से आगे बढऩे का खतरा मंडराने पर राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में दस्तक देने के साथ ही सरकार के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। फिलहाल चुनाव आगे बढ़ने की सरकार की मंशा पूरी होती दिख रही है।

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