इस निर्णय के बाद अरबपति नहीं बन पाया ये शख्स

कहते है किस्मत से ज्यादा और समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता है. किस्मत सब को एक मौका देती है कोई मौका भुना लेता है और कोई उसे लात मार देता है. 52 हजार रुपये की चीज यदि लाखों करोड़ रुपये हो जाए तो इसे उस आदमी की बदकिस्मती ही कहा जा सकता है. एप्पल के को-फाउंडर रोनाल्ड दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में रहते हुए अमीरों की लिस्ट में शामिल हो सकते थे. रोनाल्ड वेन दुनिया के सबसे बदकिस्मत इंसान के तौर पर जाने जाते हैं.

एप्पल की शुरुआत 1 अप्रैल, 1976 को हुई थी. इसे शुरू करने वाले लोगों में स्टीव जॉब्स, स्टीव वॉजनिएक और रोनाल्ड वेन थे. रोनाल्ड वेन उस समय कंपनी के सबसे अनुभवी इंसान थे. 42 साल के रोनाल्ड ने ही एप्पल का पहला लोगो भी डिजाइन किया था. इतना ही नहीं, एप्पल कंपनी का पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी रोनाल्ड ने ही बनाया था. एक तरह से देखा जाए तो कंपनी की बुनियाद रोनाल्ड के बलबूते पर खड़ी हुई थी, लेकिन कुछ ऐसा हो गया कि उन्होंने 800 डॉलर में अपने शेयर बेचकर कंपनी छोड़ दी.रोनाल्ड के मुताबिक कंपनी छोड़ने का फैसला उनका अपना था. उन्हें जॉब्स के साथ काम करने में दिक्कत हो रही थी. भले ही जॉब्स लोगों के सामने एक अच्छे स्पीकर के तौर पर सामने आए हों, लेकिन असल में जॉब्स बहुत जिद्दी और जोड़-तोड़ करने वाले इंसान थे. 21 साल के स्टीव जॉब्स, 25 साल के स्टीव वॉजनिएक और 42 साल के रोनाल्ड वेन ने मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की थी.

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उस समय रोनाल्ड कंपनी के 10 प्रतिशत शेयर धारक थेरोनाल्ड वेन ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि उस समय वो 22,000 डॉलर प्रति साल कमाते थे. अपने शानदार करियर को छोड़कर वो उम्र के ऐसे पड़ाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे. कंपनी छोड़ने के बाद कुछ साल तक जॉब्स और वॉजनिएक- रोनाल्ड को वापस बुलाते रहे, लेकिन रोनाल्ड ने उनकी बात नहीं मानी, उस वक्त रोनाल्ड को यह नहीं पता था कि वह कितनी बड़ी गलती कर रहे हैं.एप्पल धीरे-धीरे दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनती चली गई और आज अपने उस गलत फैसले पर पछतावे के आलावा उनके पास कुछ नहीं है. 

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