कुंभ से पहले ही सीएम का अादेश हुआ हवाई, जानिए लापरवाही की वजह

कुंभ के मद्देनजर टेनरियों की तीन महीने (जनवरी से मार्च) तक लगातार बंद रखने का आदेश सिर्फ हवाई है। अभी तक ऐसा कोई आदेश न तो शासन की ओर से विभागों को भेजा गया है और न ही टेनरी संचालकों के पास। इतना जरूर है कि कानपुर में मई में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाषण में कहा था कि टेनरियों को इस बार तीन महीने तक बंद रखा जाएगा। बस इसी भाषण के आधार पर संबंधित विभागों ने टेनरियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था, जिसका जमकर विरोध किया गया। अब मामला फिर मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया है।

इलाहाबाद में जनवरी से मार्च के बीच कुंभ का आयोजन किया जाना है। अभी तक इन महीनों में जाजमऊ की टेनरियों में चमड़ा भिगोने और उसकी धुलाई का काम बंद करा दिया जाता है। यह बंदी भी स्नान की तारीख के तीन दिन पहले से एक दिन बाद तक रहती है। अब प्रदेश स्तर से यह हवा बनाई गई है कि टेनरियों को लगातार तीन महीने के लिए बंद किया जाएगा। सीएम के जरिए भाषण में कही गई इस बात को आदेश मानकर स्थानीय विभागीय अधिकारी बंदी को 15 दिसंबर से ही करने की बात टेनरी संचालकों से कह रहे हैं। टेनरी संचालक जब इस संबंध में कोई आदेश मांगते हैं तो सीएम के भाषण की बात कही जाती है। पिछले सप्ताह टेनरी संचालक इस मामले को लेकर सीएम से लखनऊ में मिले थे। टेनरी संचालकों के मुताबिक सीएम ने उनसे कहा कि उन्होंने गंगा में प्रदूषण जाने से रोकने को कहा था, बंदी जैसी किसी आदेश की बात नहीं कही गई थी।

कुंभ के समय टेनरियों की दिसंबर से लगातार बंदी का कोई आदेश नहीं है। मुख्यमंत्री ने 16 मई के एक कार्यक्रम में अपने भाषण में टेनरियों को कुंभ के समय बंद रखने की बात कही थी। शासन की तरफ से कोई लिखित आदेश अभी तक नहीं आया है। सीएम के कही बात को आदेश मानकर टेनरी संचालकों को टेनरियां बंद करने के लिए एक दो बार कहा गया है।

पहले की तरह इस बार भी दिसंबर में बैठक कर यह तय किया जाएगा कि टेनरियों को स्नान के तीन दिन पहले से स्नान की तारीख के दूसरे दिन तक बंद रखा जाएगा। इसका फैसला टेनरी संचालकों की बैठक में लिया जाएगा। प्रदेश सरकार को भी इसकी जानकारी लिखित में भेजी जाएगी। तीन महीने बंदी का कोई आदेश नहीं है। तीन महीने की लगातार बंदी का कोई मतलब भी नहीं है।

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