बिना वोटिंग के पहली महिला राष्‍ट्रपति बनीं सिंगापुर की हलीमा याकूब

संसद की पूर्व स्पीकर और पीपुल्स एक्शन पार्टी की सांसद हलीमा याकूब बुधवार को बिना किसी मतदान के सिंगापुर की पहली महिला राष्ट्रपति चुन ली गईं। अधिकारियों ने हलीमा (63) के प्रतिद्वंद्वियों को अयोग्य घोषित कर उन्हें राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया। दक्षिण पूर्वी एशियाई देश सिंगापुर में राष्ट्रपति के पास सीमित शक्तियां हैं। इनमें कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति में वीटो का अधिकार शामिल है।Became the first woman president without voting

सिंगापुर में इस बार राष्ट्रपति का पद अल्पसंख्यक मुस्लिम मलय समुदाय के लिए आरक्षित कर दिया गया था, जिसके कारण लोगों में असंतोष भी था। इसके बाद बिना चुनाव हलीमा को राष्ट्रपति घोषित करने से आग में घी डालने जैसा काम हुआ। सोशल मीडिया पर इस निर्णय की कड़ी आलोचना हो रही है और इसे अलोकतांत्रिक बताया जा रहा है। फेसबुक पर नॉट माइ प्रेसिडेंट के नाम से पोस्ट साझा किए जा रहे हैं।

अपने निर्वाचन के बाद हलीमा ने कहा, ‘मैं सभी के लिए राष्ट्रपति हूं। हालांकि चुनाव नहीं हुए, लेकिन मैं देश की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हूं।’

हलीमा पार्लियमेंट की पूर्व स्‍पीकर हैं, इसलिए नामांकन नियमों के तहत वह इस पद के लिए योग्य थी। उनके अलावा राष्‍ट्रपति पद के लिए 4 और नामांकन आए थे, लेकिन इनमें से दो मलय नहीं थे और दो अन्‍य को पात्रता प्रमाण पत्र नहीं दिए गए। सिंगापुर में राष्ट्रपति पद पर पिछले मलय यूसुफ इसहाक थे, जिनकी फोटो देश के नोटों पर छपती है।

इसे भी पढ़े: रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए बांग्लादेश में राहत सामग्री भेजेगा भारत

मलय मूल के आखिरी राष्ट्रपति यूसुफ इसहाक थे। वह देश के पहले राष्ट्रपति थे और 1965 से 1970 तक पद पर रहे थे। हलीमा याकूब (62) चालीस सालों से सार्वजनिक जीवन में हैं। जनवरी 2013 में वह देश की पहली महिला संसद अध्यक्ष बनी थीं।

वह देश की पहली महिला राष्‍ट्रपति भी बन गई हैं। अगर राष्‍ट्रपति पद के लिए एक से ज्‍यादा आवेदन सही पाए जाते, तो सिंगापुर में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 23 सितंबर होता।

Back to top button