B’DAY SPL : माही ने वो किया जो किसी ने नहीं सोचा

जुबिली स्पेशल डेस्क
उसे भारतीय क्रिकेट का सफल कप्तान कहा जाता है। उसके नाम पर फिल्म भी बन चुकी है। क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में उसकी कप्तानी बेमिसाल रही है। दबाव में उसका खेल और निखर जाता है।
देश-विदेश में उसके खेल का डंका बजता था। जब वो शिखर पर था तो उसकी चर्चा भारत ही नहीं विदेशों में होती थी।  उसकी कप्तानी में भी रिकॉर्ड पुरुष सचिन का सपना भी सच हुआ। भारतीय टीम 1983 के बाद विश्व कप भी उसी की कप्तानी में जीता है।
इतना ही नहीं  सबसे पहले टी-20 विश्व कप का भी चैम्पियन बना लेकिन मौजूदा समय उसे टीम से आउट कर दिया है गया। आलम तो यह है कि उसके संन्यास अटकले पिछले कई महीनों से लगायी जा रही है। जी हां बात कर रहे भारतीय क्रिकेट के सबसे शानदार कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की। महेंद्र सिंह धोनी मंगलवार को 39 साल के हो गये हैं।

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माही ने काफी समय से क्रिकेट से दूर है। उन्होंने पिछले साल आखिरी बार न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमी फाइनल में बल्लेबाजी की थी। उसके बाद से माही क्रिकेट से दूर है। कहा जा रहा है कि उनका खेल खत्म हो गया है और किसी दिन भी क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं।

हालांकि माही ने अभी तक क्रिकेट से संन्यास लिया नहीं है। माही आईपीएल के सहारे टीम इंडिया में वापसी करना चाहते हैं लेकिन कोरोना काल ने उनका खेल बिगाड़ दिया है। धोनी की वापसी को लॉकडाउन और कोरोना की वजह से ग्रहण लग गया है। बीसीसीआई ने उनका करार भी खत्म कर दिया था। इसके बाद से उनके संन्यास आहट तेज हो गई थी। हालांकि जानकार मान रहे हैं धोनी आगे खेलेगे या नहीं इसका फैसला खुद धोनी कर सकते हैं।

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साल 2007 में माही को टीम इंडिया की कमान मिली थी। इसके बाद उन्होंने सफलाओं को अंबार लगा दिया था। टी-20 विश्व, 50-50 ओवर विश्व कप, चैम्पियंस ट्रॉफी और टेस्ट में नम्बर वन टीम बनाने में धोनी का सबसे बड़ा योगदान है। धोनी से साल 2004 में क्रिकेट में कदम रखा था।
धोनी ने 2008 में टेस्ट कप्तानी संभाली और ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड पर यादगार सीरीज जीत दर्ज की दिसंबर 2009 में भारत टेस्ट क्रिकेट में नंबर-1 बन गया।

हालांकि साल 2011 और 2012 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टीम इंडिया को कड़ी पराजय झेलनी पड़ी। ये वहीं दौर था जब टीम इंडिया लगातार आठ टेस्ट में हारी थी। इस हार की वजह से भारत नम्बर एक से हट गया था लेकिन 2013 में ऑस्ट्रेलिया को अपने घर में 4-0 से धोया और फिर उसी साल अजेय रहते हुए इंग्लैंड में चैम्पियंस ट्रॉफी जीती और अगले साल वल्र्ड टी-20, वल्र्ड कप के फाइनल में पहुंचे।

कप्तानी के मामले में उन्होंने 60 टेस्ट, 200 वन डे और 72 टी-20 में देश के लिए कप्तानी की है। इतना ही नहीं उनकी कप्तानी में भारत ने 27 टेस्ट,110 वन डे, 41 टी-20 मुकाबलों में जीत दर्ज की है। ओवरऑल धोनी ने 350 वन डे मुकाबले में 50.58 की औसत 10773 रन बनाये हैं। इस दौरान उन्होंने दस शतक भी लगाये हैं। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों के जहन में ये बात कौंध रही है कि आखिर क्यों धोनी टीम इंडिया से बाहर है। अगर संन्यास लेने भी धोनी चाहते है तो क्या उन्हें बीसीसीआई एक शानदार विदाई नहीं देना चाहता है।

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