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हिन्दू मुश्लिम एकता का प्रतीक है बाबा रामसनेहीदास की सामाधि स्थली

बाराबंकी। जनपद के बाराबंकी अयोध्या सीमा पर स्थित तहसील रामसनेहीघाट मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित पतित पावन कल्याणी नदी के तट के निकट बाबा रामसनेही दास की समाधि स्थली क्षेत्रवासियों के लिए श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बनी हुयी है। लोगो का मानना है कि यहां पर जो भी श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा की समाधि पर माथा टेकता है। बाबा रामसनेहीदास उसकी मनचाही मुराद पूरी करते है, इतना ही नही बाबा की समाधि हिन्दू और मुसलमान एकता का प्रतीक है। यहां सभी धर्मां के लोग आकर बाबा की समाधि पर माथा टेंककर उज्जवल भविष्य की कामना करते है।

बताते चले कि बाबा रामसनेहीदास की समाधि स्थली पर वैसे तो हर मंगलवार को सैकड़ों की तादाद में लोग आकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए बाबा की समाधि पर फूल, फल प्रसाद चढ़ाकर बाबा से अनुनय विनय करते हैं लेकिन वर्तमान समय मे कोरोना संक्रमण के चलते लोग घरों से ही पूजा पाठ करते थे, लोगें का यह भी कहना है कि बाबा के दर से आज तक कोई भी फरियादी निराश नही हुआ है। यहां पर साल में दो बड़ा मेला होता है कार्तिक माह की पूर्णिमा एवं चैत्र माह की शुक्ल पक्ष नौमी को जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्वालुओं की भीड़ हो जाती है।

समाधि स्थली के आसपास समुचित मात्रा में जगह न होने के कारण यहा आने वाले श्रद्धालुओ को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है मजबूरन लोगों का जमावडा मुख्य मार्ग ही होता है जो आने जाने वाले वाहनों सें खतरे का सूचक बना रहता है। मिली जानकारी के मुताबिक यहां की भौगोलिक स्थित पहाडी नुमा है। कालान्तर में कभी यहां सैकड़ो बीघे का बडा ही घनघोर जंगल था जहां तमाम प्रकार के हिंसक पशु भी रहते थे धीरे धीरे समय बदलता गया और जंगल काट कर लोगों ने अपने अपने मकान एवं खेत बना लिये लेकिन आज भी काफी तादाद में जंगल देखा जा सकता है।

बाबा के विषय में बताया जाता है कि वह अमैनी स्नान से आकर इस घनघोर जंगल में तपस्या में लीन हो गये बाबा के विषय में यह भी बताया जाता है कि बाबा रामसनेहीदास ने जिंदा समाधि ली थी बाबा के यश प्रताप के सामने फिरंगियों को भी झुकना पड़ा। इस परिपेक्ष्य में कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन काल में पूर्वाचल को जोड़ने हेतु कल्याणी नदी पुल पर निर्माण कार्य कराया जा रहा था वह पुल से गुजरने वाले मार्ग के बीच बाबा जी की समाधि स्थली आ रही थी लाजमी था कि यदि उस स्थान पर पुन का निर्माण हो जाता तो बाबा की समाधि स्थली को हटाना पडता अंग्रेजो की देखरेख में कुशल कारीगरों द्धारा जितनी भी पुल की जोडाई की जाती थी स्वतः रात को वह अपने आप ढह जाती थी लाख कोशिसो के बावजूद यह कार्य हफ़्तों चलता रहा अंत में बाबा को दया आई और रात्रि में पुल निर्माण कराने वाले फिरंगी आफीसर को सपना दिया कि यदि तू पुल का निर्माण कराना चाहता है तो मेरी समाधि स्थली का सपना छोडकर उतर दिशा में हटकर पुल का निर्माण करा तब पुल बन जायेगा उसने बाबा का बचन का मानकर वैसा ही किया तथा समाधि स्थली छोड कर पुल का निर्माण करवाया गया।

आज भी पुल निर्माण हेतु  प्रथम स्थान पर गलाई गयी कोठी नदी में देखी जा सकती है देवी देवता न मानने वाले फिरंगियो को भी बाबा के प्रताप के सामने झुकना पडा। सबसे सोचनीय बात तो यह है कि फिरंगियो को बाबा के प्रताप के आगे झुकना पड़ लेकिन इस रामसनेहीदासबाबा के मन्दिर एवं कल्याणी पुल पर शासन प्रशासन की नजर अभी तक नही पडी श्रद्धालुओ को नहाने के लिए कल्याणी नदी पर ना तो कोई घाट बनवाया गया है और न ही मंन्दिर को समुचित सुविधा प्रदान कि गई है।

अंग्रेजो द्वारा बनवाया गया पुल भी अपनी दुर्दशा पर आसू बहा रहा है यहां के पुजारी भोला गोस्वामी, विजयगोस्वामी एवं श्री चन्द्र गोस्वामी का कहना है की यहा शासन प्रशासन द्वारा इस मंन्दिर पर सुविधा न देने से श्रद्धालुओ को काफी समस्यो का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगो का कहना है कि जो सच्चे मन से बाबा के चौखट पर माथा टेकता है उसकी मनोकामना बाबा पूरी करते है।

जबरन घुसे हिस्सेदार, पुलिस में शिकायत

बाराबंकी। सिर्फ अपना फायदा हो और दूसरे का नुकसान ये कला बहुत कम ही लोगो के पास होती है। लेकिन जिन्होंने चालाकी के साथ जीना सीख लिया हो तो उनके लिये नियम कायदे कोई मायने नहीं रखते है। ऐसा तब ज़ब एक मकान से अलग रहने वाले दो हिस्सेदार दबंगई और षड्यंत्र का रास्ता अपना चुके हो। यह सब कोतवाली नगर क्षेत्र के मोहल्ला गुलरियागार्दा में चल रहा है, लेकिन दो दशकों तक बर्दाश्त करने के बाद ज़ब जहाँ दो भाई बिना बताये घर के अंदर मजदूर के साथ बिना मास्क घुस गये।

लेकिन ज़ब घर में रहने वाले परिवार के मुखिया को जानकारी होते ही खेद प्रकट करते हुऐ कहा की यहां वह दैनिक दिनचर्या के समय बिना बताये क्यों आये, पूछ कर आना था तो दोनों भाई वहां से जाना तो दूर झगड़े पर आमादा हो गये। आखिरकार बीते रविवार को पीड़ित ने पुलिस में शिकायत करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ना दिखा और लिखित तहरीर देनी पड़ी। प्रकरण गुलरियागार्दा निवासी दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव के मकान का है। जहाँ रविवार सुबह 9:30 बजे गेट पर आरी चलने की आवाजे आने पर नीचे जाकर देखा तो अवाक् रह गये।

जहाँ उनके चचेरे भाई सुशांत उर्फ़ गोलू व श्रीश श्रीवास्तव पुत्र स्व. केशव एक मजदूर से छोटे चाचा के हिस्सा जिसकी चाबी उनके पास रहती है, दबंग भाई उस गेट का बेलन कटवा रहे थे। जबकि उस गेट को मिट्टी का तेल डाल कर खोला जा सकता था। मकान के और हिस्सों में भी उनका कब्ज़ा है। जहाँ साल छः महीने पर आना जाना होता है। लेकिन जाते समय घर में कूड़ा करना, दो बार मुख्य दरवाज़ा भी जाते समय तोड़ा जाना इनकी आदत में शामिल है। बिना बटवारे के पूरा कीमती पुश्तैनी सामान भी मोहल्ले के दो लोगो को लालच देकर उनके सहयोग से उठा ले जा चुके है।

घर के खुले हिस्से की सफाई, टूटफूट और मरम्मत पीड़ित के परिवार को करानी पड़ती है। मकान में स्व. केशव की पत्नी अनीता उर्फ़ सरला श्रीवास्तव के साथ नवीन श्रीवास्तव का हिस्सा है। नवीन के बंद मकान के हिस्सो की चाबी सरला के दबंग पुत्र श्रीश और गोलू ही रखते है। जिनका विवादों आये दिन का नाता है। घर के बाहर के कमरे को सरला ने नवीन से मिली भगत करके पड़ोसियों को दिया हुआ है। उसमें रहने वालों द्वारा घर के चबूतरे पर मलमूत्र आदि गंदगी करने को लेकर, शिकायतकर्ता से पूर्व में विवाद हुआ था। जिसमे पुलिस की फटकार पर उन्होंने सुधार लाने का वादा किया था, लेकिन हिस्सेदार मौन रहे थे।

सन 2000 से लेकर मकान का टैक्स और वाटर टैक्स भी नहीं जमा किया गया है। जिसे सन 2000 में शिकायतकर्ता दिनेश श्रीवास्तव द्वारा ही पूरा भुगतान नगरपालिका में जमा किया गया था। हिस्सेदार, मकान के टैक्स जमा करना और कब्ज़ा किये हिस्से की मरम्मत कराना तो दूर जबरन अधिकार जता कर पीड़ित के परिवार को परेशान करते रहते है। नवीन लखनऊ में लेकिन सरला का परिवार कुछ ही दूरी पर रहता है, जिनके द्वारा झूठे और अनर्गल आरोपो के जरिये षड्यंत्र रचना उनकी आदत में शुमार है, मकान में एक रुपया लगाने की बात पर यह कह कर मुकर जाते है, की हम उसमें नहीं रहते। उक्त प्रकरण पर पुलिस का कहना है की पुश्तैनी मकान में हिस्सा हो तो भी, बिना पूछे अंदर जाकर किसी प्रकार की गतिविधि गैर कानूनी है। उक्त कोतवाली प्रभारी नगर को पीड़ित दिनेश की तहरीर पर सिटी चौकी प्रभारी ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

टूटी पुलिया से आवागमन बाधित, बारिश की वजह से नही हो रहा निर्माण 

दरियाबाद बाराबंकी । दरियाबाद टिकैतनगर मार्ग पर सिकलिक पुरवा के पास महीनों पहले पुलिया धंस जाने के कारण दरियाबाद व टिकैतनगर के बीच बड़े वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। जिससे स्थानीय दुकानदारों सहित आम लोगो को समस्याओ का सामना करना पड़ रहा  है। दरियाबाद टिकैतनगर  मार्ग पर सिकलिक पुरवा के पास महीनों पहले सड़क धंस जाने के कारण दुकानदारों सहित आम नागरिकों को समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं दरियाबाद टिकैतनगर के बीच आवागमन बड़े वाहनों का बंद है। अब बड़े वाहन बारिन बाग होकर दरियाबाद आते है लेकिन हरवंशपुर के पास गुजरी शारदा सहायक नहर के पुल की पटरी भी बड़े वाहनों के आवागमन से धंस रही है। जहां भविष्य में कभी बड़ा हादसा हो सकता है।

गौरतलब हो की बदोसराय व  कोटवाधाम मार्ग से दरियाबाद को जोड़ने वाला शारदा सहायक नहर का अद्रा पुल भी दो वर्षों से जर्जर है अगर भविष्य में नहर की पटरी धंस गयी तो दरियाबाद में बड़े वाहनों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होगी क्षेत्रीय लोगो ने जल्द निर्माण करवाये जाने की मांग की है। जब इस विषय पर अधिशासी अभियंता खंड  एक अजय कुमार से बात की गयी तो उन्होंने बताया टेंडर हो गया विभाग के खाते में पैसा आ गया है बारिश कम होने पर जल्द  निर्माण कार्य सुरु कराया जायेगा।

बांध के बाहर के गांव में घूसा पानी, बाढ़ प्रभावित इलाकों से भी बत्तर है हालात

बाराबंकी। नेपाल द्वारा सरजू नदी में पानी छोड़े जाने के कारण नदी पूरे उफान पर है। नदी के पानी ने बाराबंकी के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। नदी का जल स्तर इतना बढ़ गया है कि बंधे के अंदर के गांवों में तो पानी भरा ही है लेकिन बंधे में पड़े पाइपों से बंधे के बाहर बसे गांवो में भी पानी ने अपना पूरा कब्जा जमा लिया है। जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए है और जिन खेतो में किसानों की फसलें लहराती थी उनमे अब नाव चल रही है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इन गांवों में घरों के अंदर पानी भर गया है।

यहाँ तक कि शौचालय भी पूरी तरह बाढ़ के पानी मे डूब गए है और लोग छतों पर ही दिन रात काटने को मजबूर है और प्रशासन है कि उनकी सुध नही ले रहा है प्रसासन द्वारा बँधे के अंदर बसे गांवो को तो राहत सामग्री मिल रही है। विधायक व सांसद भी वहाँ पहुच कर राहत सामग्री का वितरण कराते है किंतु रामनगर तहसील से सटे गांवो सिरकौली साधनानापुर धनौरा चचरी बुझावनपुरवा सिलौटा सहित दो दर्जन से अधिक बांध के बाहर के गावों मे बाढ़ के पानी से किसानों की फसलें नष्ट हो गयी है।

उनके सामने खाने के लाले है किंतु राहत सामग्री से इन पीड़तों की भेंट नही हो रही है सिर्फ बंधे के अंदर रहने वाले लोग जो बंधे पर बसे है उन्ही को ही राहत सामग्री बांट कर प्रसासन अपना पल्ला झाड़ लेता है अब बँधे के बाहर के इन लोगो को प्रसासन द्वारा किसी प्रकार की मदत नही मिल रही है यहां तक कि गांवो से लोगो को निकलने के लिये नाव तक कि व्यवस्था नही कराई गई जिससे गांव के बूढ़े महिलाएं बच्चे आदि लोग जान जोखिम में डालकर अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते है।

तहसील प्रशासन ने चलाया अतिक्रमण हटाने का अभियान

सिरौलीगौसपुर बाराबंकी। कब्रिस्तान चक मार्ग व घूर गडढों की आरक्षित जमीनों पर से जेसीबी चलवा कर अवैध अतिक्रमण हटवाया गया। बता दें कि उपजिलाधिकारी के निर्देश पर ग्राम हडाहा के गाटा संख्या 604/ कब्रिस्तान गाटा संख्या 605 व 606 चकमार्ग पर हडाहा गांव का ही तालुकदार पुत्र ननकू छप्पर रखकर कब्जा किया था। जिसकी शिकायत सुनील कुमार तिवारी ग्राम सोनिकपुर मजरे सुर्रा ने की थी।

राजस्व निरीक्षक कमलेश कुमार वर्मा लेखपाल विकास मिश्रा थाना टिकैतनगर के पुलिस बल के साथ पंहुंच कर अवैध अतिक्रमण हटवाते हुये अतिक्रमणी के विरूद्व विधिक कार्यवाही भी की जा रही है। इसी क्रम मे ग्राम लालपुर मजरे भरथीपुर के सुरेश की शिकायत गाटा संख्या 37/38 घूर गडढा की आरक्षित भूमि पर नंदकिशोर नौमीलाल विन्द्रा प्रेम विटटी रानी दयाराम रामू चौहान सहित एक दर्जन लोग घूर गडढे की आरक्षित जमीन पर छप्पर डाल घर मकान बनाकर कब्जा कर रखे थे।

उपजिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक दीनानाथ यादव आशुतोष वर्मा योगेन्द्र आयुष सियाराम सहित आधा दर्जन से अधिक लेखपालों की टीम ने लालपुर गांव के उपरोक्त अतिक्रमणीय के छप्पर आदि जे सी बी से हटवा कर मकान व कालोनी बनाकर रह रहे अवैध कब्जेदारों के विरूद्व विधिक कार्यवाही शुरू कर दी है। उपजिलाधिकारी की इस कार्यवाही से क्षेत्र के अवैध कब्जेदार अतिक्रमणीयों मे हडकम्प मच गया है।

दो मकानों में चोरों ने किया हाथ साफ, लाखों का समान लूटकर फरार

असन्द्रा बाराबंकी। थाना असन्द्रा क्षेत्रान्तर्गत में बीती रात दो मकानों में घुसकर चोर नगदी तथा सोने चांदी के आभूषणों समेत लाखों का सामान उठा ले गए। चोरी की इन घटनाओं की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिसिया कार्रवाई हमेशा की तरह इस बार भी सिर्फ मौका मुआयना तक ही सीमित रही।

बताया जाता है कि मामला थाना असन्द्रा क्षेत्र के सिल्हौर गांव का है। इसी गांव के दो घरों में अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर लाखों का माल पार कर दिया गया। गांव के ही कपिल देव के मकान की छत पर चढ़कर चोर नीचे उतर आए और घर में रखें 15 सौ रुपए की नगदी ढाई सौ ग्राम चांदी के जेवर उठा ले गए घटना के समय कपिल देव की 80 वर्षीय माताजी छत पर लेटी थी।

इसी रात गांव के अशोक कुमार तिवारी के घर नकब लगाकर अज्ञात चोर 10 तोला की चेन एक सोने की अंगूठी पेंट में रखे पच्चीस सौ व बक्से में रखे 56 सौ रुपए व तीन गैस सिलेंडर बोलेरो व मोटरसाइकिल के कागजात चोर उठा ले गए जब सुबह पीड़ितो को इसकी जानकारी हुई तो पीड़ितों ने इसकी जानकारी स्थानीय थाने पर दी जिस पर सूचना पर पहुंची और हमेशा की तरह मौका मुआयना कर वापस लौट आई। इस संबंध में थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है ।

भारतीय किसान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष ने महंगे दामों में यूरिया खाद बेचने का लगाया आरोप

असन्द्रा बाराबंकी । भारतीय किसान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राम अधार यादव ने उर्वरक विक्रेताओं पर महंगे दामों में यूरिया खाद बेचने का आरोप लगाते हुए उच्चधिकारियों को एक शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।

बताया जाता है कि संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राम अधार यादव ने बताया कि इस समय किसानों को यूरिया खाद की बहुत सख्त जरूरत है। सहकारी समिति नसीपुर में खाद न मिलने के कारण किसानों को मजबूर होकर अन्य खाद की दुकानों पर जाना पड़ रहा है। जिसके चलते देवीगंज असंद्रा नई सड़क कादिरपुर रसूलपुर कोठी तथा सिद्धौर आदि जगहों पर खाद विक्रेता मनमाने दामों में यूरिया खाद की बिक्री कर रहे हैं। खूब मलाई काट रहे है।

उन्होंने बताया कि 267 की बिकने वाली यूरिया खाद 450 रुपए में बेची जा रही है l भारतीय किसान संघ के ब्लाक अध्यक्ष राम अधार यादव सहित अन्य किसानों ने मिलकर जिलाधिकारी बाराबंकी से शिकायत कर इस पर अंकुश लगाने की मांग की है l

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