जबलपुर पुलिस का मेहमान बना ये विदेशी नागरिक, नाइजीरियन जॉन का खर्च उठा रहा विभाग

विदेशी नागरिक मध्यप्रदेश की जबलपुर पुलिस का मेहमान बन गया है. क्योंकि मेहमान मेट्रोमोनियल वेबसाइट शादी डॉट कॉम के जरिए महिलाओं से फ्रॉड करने के मामले में जॉन को जेल हो गई थी. हालांकि डिस्ट्रिक कोर्ट से नाइजीरियन के जॉन को दोषमुक्त कर दिया गया. जॉन का तब तक वीजा ही खत्म हो गया.

लिहाजा जॉन के पास पासपोर्ट तो है. लेकिन वीजा नहीं है. इसलिए नाइजीरियन की वतन वापसी मुश्किल हो रही है. लिहाजा नाइजीरियन जॉन को सिविल लाइन थाने में नजर बंद करके रखा गया है. जिसे खाने पीने से पूरा खर्चा मध्य प्रदेश पुलिस उठा रही है. वहीं, अब जबलपुर पुलिस ने केंद्र सरकार और असेंबी को इसकी सूचना दे दी है.

जॉन को 3 साल हुई सजा
2018 में एमपी की स्टेट साइबर सेल ने नाइजीरिया के 44 साल के जॉन अनुबिरी उर्फ़ ब्राउनी और उसके तीन भारतीय साथियों के साथ गिरफ्तार किया था. मैट्रिमोनियल फ्रॉड के कारण 6 साल तक जॉन का केस जबलपुर के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चलता रहा. जॉन को 3 साल की सजा भी हुई.

जॉन के पास नही है वीजा
हालांकि साइबर सेल पुलिस के पास जॉन के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे. लिहाजा कोर्ट ने कुछ दिन पहले जॉन को दोषमुक्त कर दिया. लेकिन जॉन के पास पासपोर्ट था. लेकिन वीजा नहीं था. इसी कारण जबलपुर पुलिस ने जॉन को सिविल लाइन थाने में नजरबंद कर लिया. अब जॉन को नाइजीरियन वापस भेजने की तैयारी में जबलपुर पुलिस जुटी हुई है.

नाइजीरिया भेजने का खर्च आएगा करीब डेढ़ लाख
जॉन को नाइजीरिया भेजने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च आएगा. जॉन को वापस उसके देश नाइजीरिया भेजा जा सके. इसके लिए सिविल लाइन पुलिस ने दूतावास को पत्र भी लिखा हैं. जिसके साथ एक एएसआई और एक आरक्षक का नाम भी दूतावास को भेजा हैं. जो जॉन को वापस नाइजीरिया छोड़कर आएंगे. जॉन की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. यही कारण है कि जॉन के परिजन पैसे न होने की बात कर रहे हैं. जॉन रोज अपनी बहन से बात करता है. दो माह पहले ही जॉन के पिता की मौत हो चुकी है.

2015 में भारत आया था जॉन
नाइजीरियन के जॉन ने बताया कि 2015 में वीजा और पासपोर्ट लेकर भारत आया था. जहां दिल्ली में रहकर बिजनेस किया करता था. यहां तीन भारतीयों के साथ दोस्ती हुई और फ्रॉड करना शुरू कर दिया. जॉन shaadi.com साइट के जरिए ठगी का काम किया करता था. यहां चारों ने मिलकर दिल्ली में घर भी लेकर रखा था. चारों ने अलग-अलग नाम से बैंक के खाते भी खोल रखे थे. जॉन और उसके साथी अमीर महिलाओं को अपना टारगेट बनाते थे. महिलाएं चारों के चक्रव्यूह में फंस जाती थी.

फटाफट हिंदी भी बोल लेता है नाइजीरियन जॉन
लोकल 18 की मुलाकात नाइजीरियन जॉन से जबलपुर के सिविल लाइन थाने में हुई. हालांकि पुलिस ने बातचीत करने से मना किया. फिर भी जॉन ने अपनी इच्छा जाहिर की. जॉन इंग्लिश के साथ ही फटाफट हिंदी भी बोल लेता है. जॉन ने बताया कि वह पांचवी पास है. दिल्ली में रहकर हिंदी भी धीरे-धीरे सीख ली. हालांकि जॉन का मन दिल्ली में रहकर ही काम करने का है. जॉन अब शादी भी करना चाहता है. लिहाजा जॉन थाने में बंद होकर इधर-उधर अपना समय व्यतीत कर रहा है. जॉन को अब बाहर निकलने का इंतजार है.

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