अलग ही आकार के बन रहे हैं नए ग्रह, बिलकुल जेम्स चॉकलेट की तरह!

जितनी तेजी से स्पेस टेक्नोलॉजी की तरक्की हो रही है, उतनी ही तेजी से नई रिसर्च से नए और अनोखे खुलासे भी हो रहे हैं. अब नई रिसर्च में साइंटिस्ट ने अभी तक कि जुटाई जानकारी को एक प्रोग्राम में डाला और उससे हासिल नतीजों से यह पता लगाया कि अभी जो नए ग्रह बन रहे हैं उनका आकार कुछ असामान्य रहेगा यानी वैसा नहीं होगा जैसा की हम आम तौर पर मानते हैं. स्टडी के मुताबिक यह आकार गोलाकार ना होकर ओब्लेट हो जाएगा बिलकुल वैसा ही जैसे मशहूर जेम्स चॉकलेट की गोलिया होती हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ सेंटरल लंकाशायर के शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि नए बनने वाले युवा ग्रह ओब्लेट स्फियरॉयड्स आकार के होंगे, यानी की गोलकार तो होंगे लेकिन ऊपर से कुछ चपटे से होंगे. ये तश्तरी और गोलकार के बीच के आकार के होंगे. इस तरह की रंगीन चॉकलेट कैंडी भारत में जेम्स नाम से बिकती हैं.
शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में कम्प्यूटर सिम्यूलेशन का उपयोग किया जिससे उन्होंने युवा तारों के पास घनी गैस की डिस्क में बन रहे ग्रहों के आकार के मॉडल बनाए. उन्होंने इन मॉडल की तुलना अवलोकनों से की और पाया कि युवा ग्रह कुछ असामान्य सा आकार बना रहे हैं. इस तरह से ग्रहों के आकार को जांचने के बारे में पहले कभी नहीं सोचा गया था.
अब तक 5 हजार बाह्यग्रहों की खोज हो चुकी है, पर वैज्ञानिक अभी तक ग्रह के निर्माण की गुत्थी को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं. शुरू में शोधकर्ताओं ने विशाल गैस के ग्रहों के आकार पर ध्यान केंद्रित किया. इनमें से कुछ तो हमारे सौरमंडल से भी भारी ग्रह है. जबकि आकार का संबंध ग्रह के बनने की गति से होता है.
अभी तक वैज्ञानिक मातने हैं कि धूल के कण धीरे धीरे जमा होकर लंबे समय में एक ग्रह का आकार ले लेते हैं. लेकिन ग्रह कम समय में भी बन सकते हैं जब युवा तारों के पास घूमती हुई बड़ी डिस्कके टुकड़े होते हैं जिससे जल्दी से तारे से दूर बड़े ग्रह के बनने की संभावना होती है.
शोधकर्ताओं के नए मॉडल के मुबातिक नए ग्रह ओब्लेट कार के होते हैं क्योंकि जब कोई पदार्थ उन पर गिरता है तो वह ध्रुवों पर गिरता है फिर वहां से उसमें भार वितरित होता है.वहीं अगर यह ग्रह पृथ्वी से सामने की ओर से दिखता है तो वह गोलाकार दिखेगा, जबकि ऊपर से दिखने पर वह ओब्लेट आकार का दिखेगा.





