हिजाब बैन के खिलाफ दायर हुई सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने रखा सुरक्षित

कर्नाटक में हिजाब बैन के खिलाफ दायर हुई सभी याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज एक बार फिर से सुनवाई हुई. इस सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. गुरुवार की सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की तरफ से जहां एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवदगी ने दलीलें पेश कीं, वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने अपनी दलीलें पेश कीं.

दस दिन तक चली सुनवाई

इस मामले की सुनवाई पूरे 10 दिन चली. इस मैराथन सुनवाई के दौरान हिजाब पक्ष के समर्थकों की ओर से 21 वकीलों की भारी भरकम टीम के अलावा कर्नाटक सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG), एडवोकेट जनरल, और ASG के साथ शिक्षकों की ओर से भी पेश हुए वकीलों ने दलीलें रखीं थी. 

इससे पहले कोर्ट में क्या हुआ?

इससे पहले 9 दिन तक चली सुनवाई में अपने अपने पक्ष को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च अदालत में एक से बढ़कर एक दलीलें रखी गईं. सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक सरकार का पक्ष रख रहे अडिशनल सॉलिसिटरल जनरल केएम नटराज ने कहा, ‘सभी धर्मों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए. कोई भी यह नहीं कह सकता कि उसके पास मनमाने अधिकार हैं.’

संवैधानिक बेंच में भेजें केस: याचिका कर्ता

इतने दिनों की सुनवाई के बीच याचिकाकर्ता ने इस मामले की सुनवाई के लिए इसी केस को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के पास भेजने की मांग करते हुए कहा कि हिजाब का विवाद धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस केस को संवैधानिक बेंच में भेजा जाना चाहिए.

कोर्ट की टिप्पणी जो सुर्खियों में रही

कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि हिजाब पहनना कोई जरूरी धार्मिक प्रैक्टिस नहीं है. कोर्ट ने कहा कि सवाल उठता है कि क्या एक सेक्युलर देश में, जहां एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में एक ड्रेस कोड होता है, क्या वहां हिजाब पहनने को सही कहा जा सकता है?

वहीं जब सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ड्रेस कोड लागू करने का मतलब है कि आप लड़कियों को कॉलेज जाने से रोक रहे हैं. तब जस्टिस गुप्ता ने कहा कि पब्लिक प्लेस पर ड्रेस कोड लागू होता ही है. इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पगड़ी की तुलना हिजाब से नहीं कर सकते हैं.

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