गुजरात के बाद राजस्थान में बीजेपी को कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रही कांग्रेस

गुजरात में बीजेपी को अच्छी टक्कर देने के बाद अब कांग्रेस अपनी नई रणनीति से राजस्थान में भी इसे कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रही है. उपचुनाव में तो बीजेपी को अपनी जीत का पूरा भरोसा है, लेकिन कांग्रेस ने इस चुनाव में उसे कड़ी टक्कर देने की रणनीति बनाकर इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बना दिया है. कांग्रेस इस राज्य में नई रणनीति का सहारा ले रही है, यहां उसकी रणनीति गुजरात से पूरी तरह से अलग है.

गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंदिर-मंदिर जाकर हिंदू वोटर्स को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे. यही नहीं, उन्होंने दूसरे धर्मस्थलों से किनारा ही कर लिया. कांग्रेस के नेता उन्हें असली ‘जनेऊधारी हिेंदू’ बता रहे थे. यही नहीं, उन्होंने ऐसा कोई मसला नहीं उठाया जिससे कहीं से यह लगे कि कांग्रेस मुसलमानों का समर्थन या तुष्टीकरण कर रही है.

गुजरात में कांग्रेस ने शायद इसलिए यह रणनीति अपनाई थी, क्योंकि वहां मुस्लिम बिखरे हुए हैं और इसलिए वह किसी विधानसभा के चुनाव के नतीजों पर असर नहीं डाल सकते थे. धर्म के मामले में तो राजस्थान में भी कांग्रेस शायद यही रणनीति अपनाए, लेकिन कांग्रेस का असल खेल जाति के मामले में दिख रहा है.  

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सवर्णों को मिलेंगे ज्यादा टिकट!

कांग्रेस का राजस्थान में सबसे ज्यादा प्रचार इस बात का होगा कि वसुंधरा सरकार ने अशोक गहलोत सरकार द्वारा शुरू किए जाने वाले सभी विकास कार्यों को ठप कर दिया है. इसके अलावा कांग्रेस को इसके बाद सबसे ज्यादा भरोसा जाति समीकरण के आधार पर अपने टिकट बंटवारे के कौशल पर होगा. कांग्रेस इस बार सवर्णों को बड़ी संख्या में टिकट देकर लुभाने की कोशि‍श करेगी. बीजेपी तो राजस्थान में यह पहले से करती आ रही है, लेकिन अब कांग्रेस इस मामले में उसे मात देने की तैयारी कर रही है.

हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि कि सिर्फ किसी जाति के उम्मीदवार को टिकट देने से क्या उस जाति के लोग कांग्रेस को वोट करते हैं या नहीं. मुसलमानों के मामले में कांग्रेस किसी तरह का तुष्टीकरण तो नहीं करेगी, लेकिन यह जरूरत प्रचारित करेगी कि उनको निशाना बनाया जा रहा है, उन पर हमले किए जा रहे हैं. कांग्रेस ने यह संकेत दिया है कि वह बदलाव को तैयार है और मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए नई रणनीति अपनाएगी.

बीजपी के पास समर्पित, अनुशासि‍त कॉडर की फौज है और नरेंद्र मोदी, अमित शाह जैसे हर दिन लगातार काम करते रहने वाले नेता हैं. बीजेपी को अपने संगठनात्मक ताकत, सोशल इंजीनियरिंग और जाति समीकरण पर भरोसा है. अजमेर-अलवर बेल्ट में बनिया, राजपूत, सैनी, जाट, मीणा और दलित वोटर्स की बड़ी संख्या है. यह वही इलाका है जहां पहलू खान मारा गया था. इसके बावजूद बीजेपी ने अपने तेवर नरम नहीं किए हैं.

राज्य में वसुंधरा सरकार को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में कांग्रेस द्वारा जाति का सहारा लेना और खासकर सवर्णों को लुभाने की कोशिश विधानसभा चुनाव को रोचक बना सकती है. 

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