आखिर क्या है ऐसी बात जो, ये दोनों ने लिया संन्यास, पति ने छोड़ी 100 करोड़ की प्रॉपर्टी, तो पत्नी ने छोड़ी लाखों की नौकरी…
नीमच/इंदौर.100 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी और हर महीने लाखों की कमाई छोड़कर एक कपल ने संत बनने का फैसला लिया है। नीमच में बड़े बिजनेस घराने से ताल्लुक रखने वाले इस शख्स ने लंदन से बिजनेस का डिप्लोमा किया है तो वहीं, पत्नी ने इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर जॉब भी किया।

क्या है मामला…
-नीमच शहर के सेठ नाहरसिंह राठौर के पुत्र और पुत्रवधु ने हर महीने की लाखों की कमाई और परिवार की करीब 100 करोड़ की संपति, तीन साल की बेटी को छोड़ और राजसी जीवन त्यागकर संन्यास धारण करने का फैसला लिया है।
-नाहरसिंह के पोते सुमित राठौर (34) और पत्नी अनामिका (34) सूरत में 23 सितंबर को जैन दीक्षा लेकर साधु जीवन अपनाएंगे।
-सूरत में साधुमार्गी जैन आचार्य रामलाल महाराज के सान्निध्य में यह दीक्षा जैन समाज में बिरला उदाहरण बनने जा रही है।
-अनामिका चित्तौड़गढ़ में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कपासन निवासी अशोक चंडालिया की बेटी है।
-इनकी शादी चार साल पहले ही हुई। भरे-पूरे संपन्न संयुक्त परिवार के साथ इनके 2 साल 10 महीने की बेटी इभ्या भी है।
-परिवार के भरसक प्रयास के बावजूद वे निर्णय पर अड़िग रहे।
-नीमच में बड़े बिजनेस घराने के इस परिवार की 100 करोड़ से भी अधिक की प्रापर्टी है, लेकिन वे इसे तिलांजलि देकर सूरत में दीक्षा लेंगे।
-नाहरसिंह के पोते सुमित राठौर (34) और पत्नी अनामिका (34) सूरत में 23 सितंबर को जैन दीक्षा लेकर साधु जीवन अपनाएंगे।
-सूरत में साधुमार्गी जैन आचार्य रामलाल महाराज के सान्निध्य में यह दीक्षा जैन समाज में बिरला उदाहरण बनने जा रही है।
-अनामिका चित्तौड़गढ़ में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कपासन निवासी अशोक चंडालिया की बेटी है।
-इनकी शादी चार साल पहले ही हुई। भरे-पूरे संपन्न संयुक्त परिवार के साथ इनके 2 साल 10 महीने की बेटी इभ्या भी है।
-परिवार के भरसक प्रयास के बावजूद वे निर्णय पर अड़िग रहे।
-नीमच में बड़े बिजनेस घराने के इस परिवार की 100 करोड़ से भी अधिक की प्रापर्टी है, लेकिन वे इसे तिलांजलि देकर सूरत में दीक्षा लेंगे।
बेटी की फिक्र नहीं, कहते हैं इसी से आया आत्मकल्याण का बोध
-बेटी आठ महीने की हुई, तभी सुमित व अनामिका ने शीलव्रत यानी ब्रह्मचर्य पाल लिया।
-परिजनों के अनुसार तब से लगने लगा कि ये दीक्षा ले सकते हैं, लेकिन इतना जल्दी निर्णय ले लेंगे, यह नहीं सोचा था।
-बच्ची के बारे में कहने पर उनके आध्यात्मिक तर्क सब पर भारी पड़ गए।
-यह तक कहा कि यह बच्ची बहुत पुण्यशाली है, इसलिए इसके गर्भ में आते ही हमारे में आत्म कल्याण का बोध आ गया था।
-परिजनों के अनुसार तब से लगने लगा कि ये दीक्षा ले सकते हैं, लेकिन इतना जल्दी निर्णय ले लेंगे, यह नहीं सोचा था।
-बच्ची के बारे में कहने पर उनके आध्यात्मिक तर्क सब पर भारी पड़ गए।
-यह तक कहा कि यह बच्ची बहुत पुण्यशाली है, इसलिए इसके गर्भ में आते ही हमारे में आत्म कल्याण का बोध आ गया था।
इसे भी देखें:- अभी-अभी: पीएम मोदी ने महगाई को दिया जोरदार झटका, अब 32रुपए/लीटर सस्ता मिलेगा पेट्रोल
एक महीने पहले टल गई दीक्षा पर निर्णय से पीछे नहीं हटे
-22 अगस्त को पर्युषण का चौथा दिन था। सुमित ने आचार्य रामलाल की सभा में खड़े होकर कह दिया कि मुझे संयम लेना है।
-आचार्य ने सबसे पहले पत्नी की आज्ञा को जरूरी बताया। अनामिका ने कह दिया कि मैं भी दीक्षा लूंगी। यदि दोनों की दीक्षा हो तो आज्ञा है।
-सुनते ही दोनों ओर के परिवार सूरत गए और समझाया। ढाई साल की बेटी का हवाला देते हुए इजाजत नहीं दी।
-यकायक दीक्षा टल गई, लेकिन दोनों अडिग रहे। चंडालिया दंपती इभ्या को लेकर ननिहाल कपासन आ गए।
-आचार्य ने सबसे पहले पत्नी की आज्ञा को जरूरी बताया। अनामिका ने कह दिया कि मैं भी दीक्षा लूंगी। यदि दोनों की दीक्षा हो तो आज्ञा है।
-सुनते ही दोनों ओर के परिवार सूरत गए और समझाया। ढाई साल की बेटी का हवाला देते हुए इजाजत नहीं दी।
-यकायक दीक्षा टल गई, लेकिन दोनों अडिग रहे। चंडालिया दंपती इभ्या को लेकर ननिहाल कपासन आ गए।
नीमच में 1.25 लाख वर्गफीट का है ऐतिहासिक परिसर
-सुमित-अनामिका के राजसी वैभव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके दादा नाहरसिंह का कैंट में 1.25 लाख वर्गफीट में अंग्रेजों का बनाया हुआ बड़ा कमर्शियल कैंपस है।
-नीमच सिटी में बंगला है। सीमेंट कट्टों की फैक्टरी के साथ कृषि, फाइनेंस आदि का कारोबार है।
-नीमच सिटी में बंगला है। सीमेंट कट्टों की फैक्टरी के साथ कृषि, फाइनेंस आदि का कारोबार है।





