82 साल बाद दिखा ये दुर्लभ अनोखा सांप, देखकर लोगो के उड़े होश

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का सांप 1936 में पहली बार दुधवा में ही देखा गया था. उसके बाद से करीब 82 साल के बाद दोबारा इस सांप के दर्शन हुए हैं, जो एक शुभ संकेत है.

इस के सांप के दांतों की बनावट नेपाल में पाई जाने वाली खुकरी की तरह होती है. ठंड और बरसात के समय चूहे के बिल या पेड़ आदि पर बनी सुरक्षित जगह में यह रहता है. इसका जूलॉजिकल नाम ”ओलिगोडोन खेरिएन्सिस” है. चमकीले रंग के इस सांप का आकार दुर्लभ है.
वन विभाग के द्वारा इस सांप को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है. लोगों को इस सांप की खासियत के बार में बताया जा रहा है कि यह जहरीला सांप नहीं होता है, ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है. इसे मारने का प्रयास ना करें. किसी को यह सांप कहीं भी नजर आए इसकी जानकारी तुरंत वन विभाग को दी जाए.
रेड कोरल प्रजाति के सांप शर्मीले स्वभाव के होते हैं. यह जल्दी किसी को काटते नहीं हैं. ये रात में ज्यादा सक्रिय होते हैं और खुले में रहना पसंद करते हैं. यह कोबरा सांप की तरह फन नहीं निकाल सकता है. रेंगने वाले छोटे कीड़े इसका भोजन होते हैं.





