AAP नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे अरविंद केजरीवाल, महात्मा गांधी को किया नमन

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट पहुंचे हैं। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी हैं। उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी को नमन किया। इससे पहले अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में खुद या वकील के पेश नहीं होने का एलान किया। उन्होंने इसे सत्याग्रह का नाम दिया है।
यह बेहद संवेदनशील मामला है: केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘हम अपने देश की न्यायप्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं। आज हम जो आजाद घूम रहे हैं तो उसका कारण केवल हमारी न्याय प्रणाली है। कुछ ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जिस कारण हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। हमने सभी बाते उस चिट्ठी में लिखी हैं जो कि हमने जज साहिबा को भेजी है। यह बेहद संवेदनशील मामला है।’ सीबीआई की अपील याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा सुनवाई किए जाने पर आपत्ति जताने के बाद केजरीवाल ने फैसला किया कि वह आगे इस मामले में न तो खुद पेश होंगे और न ही उनके कोई वकील जिरह करेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में क्या कहा था?
केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को चार पन्नों का पत्र लिखकर यह जानकारी दी। पत्र में उन्होंने कहा कि मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह निर्णय ले रहा हूं। मैं इसके नतीजों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। हो सकता है कि इससे मेरे कानूनी हितों को नुकसान पहुंचे, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वे न्यायमूर्ति शर्मा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने लिखा अपने पत्र में अदालत में बहस के दौरान दी गई दलील दोहराते हुए कहा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।
गांधी के सत्याग्रह का हवाला
पत्र में केजरीवाल ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांत का हवाला दिया और कहा कि यह फैसला केवल इसी मामले तक सीमित है। उन्होंने न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन के उदाहरण दिए, जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के वकालत करने के कारण हाईकोर्ट से स्थानांतरण की मांग की थी। केजरीवाल ने लिखा कि न्यायमूर्ति शर्मा की टिप्पणियों से उनकी अर्जी को न्यायिक और संस्थागत अपमान के रूप में लिया गया, जिसके बाद निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं रह गई है।
सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को चिट्ठी लिखी
वहीं, मनीष सिसोदिया ने चिट्ठी में लिखा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। आपके बच्चों का भविष्य सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के हाथों में है। ऐसे में मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है। सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। ‘
यह है मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें आबकारी घोटाले में केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस अपील याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल ने 13 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर न्यायमूर्ति शर्मा से खुद को मामले से अलग करने की मांग की थी।
20 अप्रैल को अदालत ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया और टिप्पणी की कि किसी राजनेता को न्यायपालिका पर अविश्वास फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद केजरीवाल ने पत्र लिखकर कहा कि अब उन्हें विश्वास नहीं रहा कि न्यायमूर्ति शर्मा निष्पक्ष तरीके से सुनवाई कर पाएंगी।





