समुद्र के किनारे टहल रहा था 9 साल का लड़का, तभी मिली अनमोल चीज

टहलते हुए हम कई बार सोचते हैं कि काश कोई कीमती चीज मिल जाए, लेकिन हर किसी के नसीब में ये नहीं होता. मगर इंग्लैंड 9 साल के एक लड़के को यह सुनहरा मौका हाथ लगा. जब वह समुद्र के किनारे टहल रहा था, तभी उसे एक चमकदार वस्तु नजर आई. उसने उठाया तो पहले तो समझ नहीं आया, लेकिन जब वह उसे उठाकर घर लाया. बाद में जब एक्सपर्ट ने इसे देखा तो दंग रह गए. यह अनमोल खजाना था.
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बेन विटन नाम का यह लड़का ससेक्स के शोरहम बीच पर टहल रहा था. तभी उसे चट्टान का एक टुकड़ा मिला. बेन विटन ने बीबीसी को बताया- मैं इधर-उधर देख रहा था और मुझे यह चमकदार पत्थर दिखाई दिया. मुझे लगा कि यह अन्य सभी कंकड़ों और पत्थरों से अलग दिख रहा है. शायद यह खास होगा. इसलिए मैं इसे उठाकर घर लाया. कई सालों तक इसे अपने कमरे में रखा. कई बार यह गुम हुआ लेकिन हर बार मिल गया. लेकिन जब मैं वर्थिंग म्यूजियम गया, तो मेरी किस्मत बदल गई.
लड़का जब वर्थिंग म्यूजियम में रखी चीजों को देख रहा था, तो उसे एक ऐसी चीज नजर आई, जो उसके पास रखे चट्टान के टुकड़े से बिल्कुल मैच कर रही थी. वह चट्टान के पास गया और उसे गहराई से देखा. इसके बाद उसे लगा कि अपने पास रखे चट्टान के बारे में म्यूजियम को जानकारी देनी चाहिए. उसने जैसे ही म्यूजियम के एक्सपर्ट को यह दिखाया, सब चकित रह गए.
60 हजार साल पुरानी
म्यूजियम के एक्सपर्ट ने बताया कि यह मध्य पाषाण काल की एक कुल्हाड़ी थी, जो 40,000 से 60,000 साल पुरानी थी. उस वक्त निएंडरथल हुआ करते थे. सबूत इस बात की ओर से इशारा करते है कि इस कुल्हाड़ी को निएंडरथल ने ही बनाया था. वर्थिंग म्यूजियम में आर्कियोलॉजिस्ट जेम्स सेन्सबरी ने कहा, हमारे यहां अक्सर लोग ऐसी चीजें लेकर आते हैं, लेकिन इस लड़के ने जो चीज खोजी है, वह अनमोल है. 10 साल से मैने तो ऐसी कोई चीज नहीं देखी थी. ससेक्स में निएंडरथल के हाथ से बनी कुल्हाड़ी मिलना दुर्लभ बात है.
क्या होगा इसका
विटन ने कहा, पहले तो मैं इसे अपने पास रखना चाहता था, लेकिन मुझे लगा कि मेरे हाथों में रहने से बेहतर होगा कि इसे म्यूजियम में रखा जाए. वहां लाखों लोग इसे देख पाएंगे. इसके बारे में जान पाएंगे. कभी किसी ने इसके बारे में कल्पना भी नहीं की होगी. सेन्सबरी ने बताया, बेन ने हमें अगले फरवरी तक कुल्हाड़ी रखने के लिए दी है, उसके बाद इसे वापस लौटा दिया जाएगा. हम इसे ब्रिटिश म्यूजियम की पोर्टेबल पुरावशेष योजना के तहत दर्ज कराएंगे, ताकि हमेशा के लिए इसका रिकॉर्ड मौजूद रहे.





