दिल्ली-मुंबई समेत कई राज्यों में कंपनियां हो रहीं ‘बॉस स्कैम’ का शिकार

अगर आपको वाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर “स्टेटमेंट आफ अकाउंट.जिप” (अक्सर इसके आगे तिथि लिखी होती है, जैसे “0714 स्टेटमेंट आफ अकाउंट.जिप”) या “आरबीआई.जिप”, “एमसीए.जिप” जैसे नाम वाली कोई कंप्रेस्ड (.जिप) फाइल मिले, तो सावधान हो जाएं। यह कुख्यात ‘बॉस स्कैम’ का हिस्सा है।
इसमें अकाउंट स्टेटमेंट और रेगुलेटरी कम्युनिकेशन के नाम पर मालवेयर फाइलें भेजकर पेशेवरों और कारोबारियों के वाट्सएप अकाउंट को हैक कर लिया जाता है। दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में इस तरह से धोखाधड़ी की खबरें आई हैं।
पिछले कुछ दिनों में केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) ने इन चार बड़े राज्यों और अन्य जगहों पर इसी तरीके से धोखाधड़ी की घटनाओं पर संज्ञान लिया है।
साइबर क्राइम कंट्रोलिंग विंग ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों में तेजी देखी है। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों के वाट्सएप अकाउंट हैक करके उनका गलत इस्तेमाल किया जाता है, ताकि फाइनेंस स्टाफ को ‘म्यूल अकाउंट’ (धोखाधड़ी के लिए बैंक अकाउंट) में पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जा सके।
आई4सी विंग ने बताया कि जब पीड़ित वाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर मिली कंप्रेस्ड (.जिप) फाइल पर क्लिक करता है, तो उसके तुरंत बाद हैक किए गए वाट्सएप अकाउंट का इस्तेमाल पीड़ित के सभी कांटैक्ट्स और ग्रुप में उसी खतरनाक फाइल को ऑटोमैटिक रूप से भेजने के लिए किया जाता है।
इसमें फाइल को ‘सत्यापन के लिए कंपनी के फाइनेंस मैनेजर’ को फॉरवर्ड करने और उसे कंप्यूटर पर खोलने का अनुरोध किया जाता है, जिससे कारपोरेट नेटवर्क में इंफेक्शन की चेन और गहरी हो जाती है।
आई4सी ने बताया कि धोखाधड़ी की एडवांस स्टेज में, जिसे “बास स्कैम” या सीईओ बनकर धोखाधड़ी करना कहा जाता है, धोखाधड़ी करने वाले लोग किसी वरिष्ठ अधिकारी के असली वाट्सएप अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं या हैक किए गए डिवाइस में चुपके से हैकर के नंबर को ‘सीईओ’ के नाम से सेव कर देते हैं ताकि अकाउंट और फाइनेंस कर्मचारियों को म्यूल बैंक अकाउंट में तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जा सके।
आई4सी की नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (एनसीटीएयू) के तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि यह धोखाधड़ी विदेश से संगठित नेटवर्क द्वारा की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कानूनी एवं तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर जांच की जा रही है।
साथ ही मालवेयर के खतरे के संकेतों एवं टेक्निकल इंडिकेटर्स को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन), माइक्रोसाफ्ट डिफेंडर और प्रमुख भारतीय एंटी-वायरस कंपनियों (जैसे क्विक हील, के7 कंप्यूटिंग और नेट प्रोटेक्टर) के साथ शेयर किया गया है, ताकि ऐसी फाइलों का तत्काल पता लगाकर उन्हें ब्लाक किया जा सके।
अभी तक 10,000 से अधिक भारतीयों को धोखाधड़ी से बचाया जा चुका है। सहयोग पोर्टल के जरिये मालवेयर को लगातार रोका जा रहा है। ‘आइ4सीएमएचए-जी’ एसएमएस हेडर से नागरिकों को अलर्ट भेजा जा रहा है।





