अमेरिका-ईरान जंग में ठहराव से तेल सस्ता

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में कोई नया हमला न होना है। इससे उम्मीद बनी है कि कूटनीति से मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की शिपिंग फिर से शुरू हो सकती है।
शुरुआत में तेल लगभग 5 फीसदी तक गिरा। ब्रेंट क्रूड 4.37 डॉलर यानी 4.52 फीसदी गिरकर 92.41 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी WTI क्रूड भी 4.30 डॉलर यानी 4.81 फीसदी गिरकर 85.01 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
सबसे निचले स्तर पर कीमत
लगातार तीन हफ्ते बढ़ने के बाद अब दोनों तेल एक हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर हैं। सितंबर वाले ब्रेंट कॉनट्रैक्ट में 4.9 फीसदी की गिरावट आई और वो 92.02 डॉलर पर पहुंच गया। वहीं सितंबर वाला अमेरिकी क्रूड 5.6 फीसदी गिरकर 84.34 डॉलर पर आ गया।
हमले रुकने से गिरी कीमत
पिछले दो दिनों से अमेरिका और ईरान ने फारस की खाड़ी में कोई सैन्य हमला नहीं किया है। दो हफ्ते तक हमलों के बाद अब थोड़ा ठहराव आया है। अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कूटनीति के लिए समय देने के लिए हमले रोक दिए हैं।
वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 14-सूत्रीय समझौते पर बात बनती है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थिति साफ होती है तो तनाव और कम हो सकता है। हाल में मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव की वजह से ब्रेंट तेल 102 डॉलर तक पहुंच गया था। ये मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
हमले कम होने के बावजूद शिपिंग पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। Kpler के डेटा के मुताबिक वीकेंड में हर दिन 10 से भी कम तेल के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। लाल सागर में यमन के हूथी विद्रोहियों के हमलों की वजह से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से भी जहाज कम निकले।
दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से ही गुजरता है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से ये रास्ता तेल बाजार के लिए सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है। हालांकि कीमतें पिछले हफ्ते के ऊंचे स्तर से नीचे आ गई हैं, लेकिन टकराव खत्म न होने की वजह से बाजार में अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।





