ONGC ने महानदी बेसिन में शुरू की गहरे पानी में तेल की खोज, अब भारत को मिलेगा तेल का महा-भंडार?

भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने महानदी बेसिन में अपने पहले गहरे पानी वाले खोजपूर्ण कुएं (deepwater exploratory well) की खुदाई शुरू कर दी है। ‘समुद्र मंथन’ मिशन के तहत शुरू किए गए इस अभियान का उद्घाटन केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली से वर्चुअली किया।

ऊर्जा सुरक्षा की ओर बड़ा कदम
ONGC का यह नया कुआं, जिसका नाम MN-DW18-1-H-D है, ओडिशा के तट से लगभग 23 नॉटिकल मील दूर कोणार्क के पास स्थित है। यह ड्रिलिंग भारत के गहरे और बहुत गहरे पानी वाले ऊर्जा संसाधनों का पता लगाने के एक बड़े कार्यक्रम की शुरुआत है। यह जानकारी ONGC की ओर से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।

प्रधानमंत्री मोदी का विजन और ‘समुद्र मंथन’
इस मिशन की नींव 15 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान रखी गई थी, जिसमें उन्होंने भारत के समुद्र में मौजूद तेल और गैस की उस क्षमता का इस्तेमाल करने का आह्वान किया था जिसका अब तक दोहन नहीं किया गया है। इसके लिए सरकार ने समुद्र में प्रतिबंधित क्षेत्रों के लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके को खोल दिया है, जिससे खोज और अन्वेषण के नए अवसर पैदा हुए हैं।

भारत में हाइड्रोकार्बन की अपार संभावनाएं
जानकारों के अनुसार, भारत के पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय बेसिनों में 3,000 मीटर तक की गहराई पर 5,600 MMTOE (मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट) से ज़्यादा हाइड्रोकार्बन होने का अनुमान है। कावेरी, महानदी और अंडमान बेसिनों में हाल की सफलताओं ने इस भरोसे को और मज़बूत किया है।

इस राष्ट्रीय मिशन को गति देने के लिए, ONGC ने 5 जनवरी, 2026 को मुंबई में ‘DeepX’ (डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन सेंटर) लॉन्च किया। यह सेंटर “एक कंपनी, एक डेटा” के सिद्धांत पर काम करता है और एक ही प्लेटफॉर्म पर एडवांस्ड जियोलॉजिकल विशेषज्ञता और ग्लोबल सहयोग को एक साथ लाता है।

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