महाराष्ट्र में माझी लाडकी बहिन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लोकलुभावन अंदाज में शुरू की गई शिंदे सरकार की महात्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ इन दिनों इसके पात्रों की संख्या में हो रही भारी कटौती के कारण चर्चा में है।

संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई सघन पात्रता छानबीन के बाद लगभग 92 लाख महिलाओं को इस योजना से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

चुनावी वैतरणी पार करने के लिए मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही इस योजना को लेकर प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर मचे इस हड़कंप ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार भी दे दिया है।

चुनावी चौसर पर बिछी इस बिसात के बीच, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की तीखी टिप्पणियों और धरातल पर सामने आई बड़ी धांधलियों ने त्रिदलीय सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुछ महीने पहले जब इस योजना के लाभार्थियों के दस्तावेजों की प्रारंभिक स्क्रूटनी (छानबीन) शुरू हुई, तो प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए।

जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि हजारों ऐसी महिलाएं इस योजना का अवैध रूप से लाभ ले रही थीं, जो इसकी मूल शर्तों को पूरा ही नहीं करतीं। हद तो तब हो गई जब यह पता चला कि मुंबई स्थित राज्य मंत्रालय (सचिवालय) में कार्यरत कई सरकारी महिला कर्मचारी भी हर महीने मिलने वाली 1,500 की इस सम्मान राशि को डकार रही थीं।

नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकारी कर्मचारी या आयकर दाता के परिवार को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। इसके बावजूद अपात्र महिलाओं और समृद्ध पृष्ठभूमि से आने वाले परिवारों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी खजाने में सेंध लगाई।

इस योजना पर केवल जमीनी धांधली के ही आरोप नहीं हैं, बल्कि देश की सर्वोच्च ऑडिट संस्था सीएजी ने भी इस पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय असंतुलन को लेकर चिंता जताई है।

ऑडिट संस्था का स्पष्ट मानना है कि बिना किसी ठोस बजटीय योजना और राजस्व स्रोत के, केवल राजनीतिक लाभ के लिए इतनी बड़ी योजना लागू करने से महाराष्ट्र पर कर्ज का बोझ असहनीय स्तर तक बढ़ सकता है।

सीएजी की इस चेतावनी ने योजना के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल गहरे कर दिए हैं। सरकार पर बढ़ते वित्तीय दबाव और अपात्रों की पहचान होने के बाद अब छंटनी की प्रक्रिया को बेहद कड़ा कर दिया गया है।

बैंक खातों से आधार लिंक न होने, फर्जी आय प्रमाण पत्र और एक ही परिवार से कई आवेदन होने के कारण स्क्रूटनी तेज कर दी गई है। अनुमान है कि पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने तक करीब 92 लाख संदिग्ध और अपात्र आवेदनों को हमेशा के लिए निरस्त किया जा सकता है।

चुनाव जीतने के लिए सरकारी खजाने को दांव पर लगाने के विपक्ष के आरोपों को इस छानबीन से और बल मिला है। यदि इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं योजना से बाहर होती हैं, तो इसका सीधा असर सत्ताधारी महायुति गठबंधन के वोट बैंक पर पड़ सकता है।

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