डिजिटल बर्नआउट छीन रहा है वर्किंग प्रोफेशनल्स का सुकून

मॉडर्न दुनिया लोगों से डिजिटली ज्यादा जुड़ी हुई है, सोशल मीडिया पर पल-पल की अपडेट देना, घंटों लैपटॉप के सामने बैठना या छुट्टी वाले दिन मनपसंद मूवी या सीरीज देखना जैसी कोई न कोई वजहें हमें आदतन डिजिटली मौजूद रखती हैं। यही अवेलेबिलिटी मेंटल हेल्थ पर आगे चलकर भारी पड़ती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां दिन भर की भागदौड़ से लोग बर्नआउट होते हैं तो स्क्रीन टाइम ज्यादा होने से डिजिटली भी बर्नआउट होते हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

डिजिटल बर्नआउट क्या है?
बर्नआउट का मतलब किसी काम को लगातार और लंबे समय तक करते रहना है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति अपने काम से ऊब सकता है, पर डिजिटल बर्नआउट का सीधा कनेक्शन स्क्रीन टाइम से है। अब सवाल यह है कि कैसे पता चले कि व्यक्ति डिजिटल बर्नआउट का शिकार है? तो इसे पहचानने के कई लक्षण हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं।

डिजिटल बर्न आउट के संकेत
डिजिटल बर्नआउट को एक दो नहीं बल्कि कई संकेतों से पता लगाया जा सकता है:

काम में दिलचस्पी खत्म हो जाना

डिप्रेशन

नींद न आना

शरीर और मन की थकावट

एंग्जायटी

सीने में दर्द की शिकायत

इमोशनल इन्सटेबिलिटी

आंखों का ड्राई होना

सिर, गर्दन या कंधों में दर्द

फोकस में कमी

चिड़चिड़ापन

डिजिटल बर्नआउट से कैसे बाहर आएं?
डिजिटल बर्नआउट से बाहर निकलने और फिर से शरीर और मन में वही फुर्ती पाने के लिए एक सख्त रूटीन की खास जरूरत है, जिसमें स्क्रीन टाइम बिल्कुल शामिल न हो।

स्क्रीन टाइम बेहद कम कर दें, खासकर छुट्टी वाले दिन स्क्रीन देखने से बचें और बाकी दिनों में हर थोड़े समय में स्क्रीन के सामने से ब्रेक लें।

20-20-20 रूल फॉलो करें, इसका मतलब है कि 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए ब्रेक लें और 20 फीट दूर राखी चीज की तरफ देखें।

पूरी तरह से स्क्रीन टाइम खत्म नहीं कर सकते तो पूरे हफ्ते में एक बार स्क्रीन से दूरी बनाने का तय करें।

माइंडफुलनेस की प्रैक्टिस से डिजिटल बर्नआउट से बाहर आया जा सकता है। इसके लिए डेली रूटीन में डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज को शामिल करें।

रोजाना एक्सरसाइज करने से फिजिकल और मेंटल हेल्थ को ठीक रखा जा सकता है। इसके लिए डेली 15-20 मिनट की वॉक भी किसी जादू जैसा काम कर सकती है।

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