‘देशभक्ति की मिसाल राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को नमन’, काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक की जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ के ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के नायक राजेंद्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान युवाओं को सदैव राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
आदित्यनाथ ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”क्रांति पथ के अडिग राही, ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के महानायक राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।” उन्होंने कहा, ”मातृभूमि की स्वतंत्रता हेतु उनका सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र के युवाओं को सदैव देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करता रहेगा।”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने किया नमन
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”अमर क्रांतिकारी, काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक, मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।” चौधरी ने कहा, ”उनका अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की अमर गाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।”
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का संदेश
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”काकोरी ट्रेन एक्शन के नायकों में से एक, मां भारती के वीर सपूत एवं अदम्य साहस के प्रतीक अमर क्रांतिकारी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।”
मौर्य ने कहा, ”राजेंद्रनाथ लाहिड़ी जी ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर राष्ट्रभक्ति, त्याग और वीरता की अमर गाथा लिखी। उनका राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण आज भी युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।”
ब्रजेश पाठक ने भी दी श्रद्धांजलि
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, ”भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के युवा क्रांतिकारी, जागृत भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक, अमर शहीद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जी की जयंती पर शत शत नमन।”
कौन थे राजेंद्रनाथ लाहिड़ी?
राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी का जन्म 29 जून 1901 को बंगाल में वर्तमान पावना जिला के मोहनपुर गांव में हुआ था। परिस्थितियों के कारण मात्र नौ वर्ष की उम्र में ही वह बंगाल से अपने मामा के घर उत्तर प्रदेश के वाराणसी आ गए थे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई। उन दिनों वाराणसी क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था।
काकोरी ट्रेन एक्शन में निभाई अहम भूमिका
अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने के लिए ब्रिटिश हथियार खरीदने के वास्ते पैसे का प्रबंध करने के लिए पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां के साथ मिलकर राजेन्द्र लाहिड़ी ने अन्य सहयोगियों के साथ नौ अगस्त 1925 की शाम सहारनपुर से लखनऊ पहुंचने वाली आठ डाउन ट्रेन पर काकोरी रेलवे स्टेशन पर धावा बोल दिया और सरकारी खजाना लूट लिया।
इस घटना का मकसद था कि इस लूट से इकट्ठा होने वाले पैसों से हथियार खरीदे जाएं और भारत पर कब्जा करने वाले अंग्रेजों के खिलाफ उनका इस्तेमाल किया जाए। अंग्रेजों ने इसे डकैती का नाम दिया और इसमें शामिल राष्ट्रनायकों को अपराधी करार दिया। इतिहास में इस घटना को ‘काकोरी कांड’ के नाम से जाना गया, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इस घटना के नाम में बदलाव कर इसे ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ कहा।
17 दिसंबर 1927 को दी गई फांसी
इस मामले में चार क्रांतिकारियों राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खां को फांसी की सजा सुनाई गई। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा सभी क्रांतिवीरों को प्रदेश की अलग-अलग जेलों में रखा गया। राजेन्द्र नाथ लाहिडी को गोंडा जेल भेजा गया, जहां उन्हें 17 दिसंबर 1927 को फांसी दी गयी।





