अवैध शिकार के कारण हो रही बाघों की मौत

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने देशभर में बाघों की अप्राकृतिक मौतों के लिए शिकार को बड़ा कारण मानने की स्वीकारोक्ति मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष की है।

कोर्ट को दिए हलफनामे में एनटीसीए ने स्पष्ट रूप से माना है कि संरक्षित बाघ अभयारण्यों तथा उनके आसपास बाघों की हालिया अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारणों में से एक है।

यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब तक अधिकतर बाघों की मौतों को लेकर वन्य विभाग के जिम्मेदारों द्वारा शिकार की बात से इनकार कर बीमारी जैसे कारण बताए जाते रहे हैं, लेकिन अब शीर्ष संरक्षण संस्था ने स्वयं ही शिकार की गंभीरता को कोर्ट के समक्ष मान लिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष एनटीसीए ने यह हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया, जिसे वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दायर कर अभयारण्यों के भीतर और आसपास लगातार हो रहीं बाघों की संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।

याचिका में दावा किया गया है कि अनेक मामलों में मौतें संगठित शिकार का परिणाम हैं। शिकार राज्य सरकार और वन विभाग का अमला रोक नहीं पा रहा है। कोर्ट ने इस पर एनटीसीए से जवाब मांगा था।

उसके उत्तर में एनटीसीए ने कहा कि देश के बाहर बाघों के अंगों और उनसे निर्मित उत्पादों की अवैध मांग उनके अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में शामिल है। यही कारण है कि इस चुनौती को प्राधिकरण ने अपनी सर्वोच्च संरक्षण प्राथमिकताओं में रखा है।

Back to top button