शरीर के अंदर छिपा ‘साइलेंट किलर’: खून की वो बीमारी जो सारी जिंदगी पकड़ में नहीं आती

कभी-कभी शरीर एकदम हेल्दी दिखता है, जिस वजह से ऐसा लगता है कि शरीर में कोई परेशानी नहीं। जबकि सिकल सेल ऐसी जेनेटिक बीमारी है जिसमें चाहे शरीर भले ही स्वस्थ दिखे, लेकिन अंदर ही अंदर यह बीमारी पनप रही होती है। बता दें कि यह कहानी सिकल सेल से पीड़ित बहुत से मरीजों की है, जिसके बारे में कुछ लोगों को तो जीवन भर पता नहीं चल पाता।

इस बारे में गुरुग्राम और फरीदाबाद स्थित मारेन्गो एशिया अस्पतालों में हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी के क्लिनिकल डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मीत कुमार और पीडियाट्रिक हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी के कंसल्टेंट और हेड डॉ. नीरज तेवतिया बता रहे हैं कि सिकल सेल बीमारी क्या है और इसका सबसे बेहतर रोकथाम क्या हो सकता है।

वर्ल्ड सिकल सेल डे : 19 जून
हर साल 19 जून को वर्ल्ड सिकल सेल डे मनाया तो जाता है लेकिन लोग इस बीमारी को लेकर ज्यादा जागरूक नहीं है। हमें यह समझने की जरूरत है कि सिकल सेल सिर्फ एक व्यक्ति की बीमारी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज से जुड़ी बीमारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत से लोगों के जीन में सिकल सेल मौजूद होता है, पर उन्हें पता नहीं होता।

सिकल सेल की बड़ी समस्या क्या है?
सिकल सेल में एक परेशानी यह है कि माता-पिता दोनों ही इस असामान्य जीन के कैरियर होते हैं जिनसे यह सेल बच्चे में प्रवेश करता है। यह एक गंभीर ब्लड डिसऑर्डर है जिसके चलते शरीर भयंकर एनिमिया की चपेट में आ जाता है। इस बीमारी में शरीर में दर्द की शिकायत, इन्फेक्शन और ऑर्गन डैमेज तक का खतरा रहता है।

यही वजह है कि सिकल सेल को लेकर जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग की खास आवश्यकता है। जानने वाली बात यह है कि एक साधारण से ब्लड टेस्ट से असामान्य सेल की जांच की जा सकती है। कई बार तो ऐसा देखा गया है कि बहुत से परिवारों में इसके कैरियर के बारे में तब पता चलता है जब घर में कोई बच्चा इससे पीड़ित हो जाता है।

सिकल सेल से बचाव के लिए उपाय
जल्दी से जल्दी स्क्रीनिंग, जेनेटिक कॉउन्सलिंग और सामाजिक शिक्षा सिकल से बचाव में बड़ी मदद कर सकती है, साथ ही इससे समय पर इलाज की व्यवस्था भी होती है। भारत कई इलाकों में बड़े स्तर पर यह बीमारी देखी जा रही है।

सिकल सेल का समाधान
सिकल सेल के समाधान के लिए स्क्रीनिंग के साथ ही यह भी मायने रखता है कि हम लोगों को इस बीमारी से रोकथाम के लिए क्या बता रहे हैं। इस बारे में हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी के क्लिनिकल डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मीत कुमार का कहना है कि कई बार बीमारी का पता लगाना जरूरी नहीं है, बल्कि यह जानना जरूरी है कि शरीर में सिकल सेल के जीन मौजूद हैं जिसके बारे में पता ही नहीं।

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