कच्चे तेल के एक बैरल में छुपी है पूरी ‘मिनी इंडस्ट्री’, अर्थव्यवस्था की है ताकत

कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल या डीजल बनाने का साधन नहीं है, बल्कि यह पूरी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। एक बैरल तेल में कई तरह के उत्पाद निकलते हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को चलाते हैं। यही वजह है कि इसे एक छोटी ‘औद्योगिक अर्थव्यवस्था’ कहा जाता है।

कच्चे तेल की कहानी साल 1859 में शुरू हुई, जब एडविन ड्रेक ने अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में पहला व्यावसायिक तेल कुआं खोदा। इसके बाद तेल ने उद्योग जगत में तेजी से जगह बनाई और 20वीं सदी तक यह कोयले को पीछे छोड़कर परिवहन, युद्ध और उद्योग का सबसे अहम ईंधन बन गया।

एक बैरल से क्या-क्या निकलता है?

आज के समय में एक आधुनिक रिफाइनरी यह दिखाती है कि एक बैरल (159 लीटर) कच्चे तेल से कितने तरह के उत्पाद बनते हैं। इसमें लगभग 42% पेट्रोल, 27% डीजल और करीब 10% जेट ईंधन बनता है।

बाकी बचे हिस्से से एलपीजी, पेट्रोकेमिकल उत्पाद, लुब्रिकेंट्स और डामर (अस्फाल्ट) बनते हैं। यही चीजें प्लास्टिक, दवाइयों, सड़कों और कई जरूरी उत्पादों में इस्तेमाल होती हैं।

वैश्विक बाजार कैसे तय करता है कीमत?

दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत कुछ प्रमुख मानकों के आधार पर तय होती है, जैसे ब्रेंट क्रूड, डब्ल्यूटीआई (WTI) और दुबई क्रूड। वहीं, ओपेक जैसे संगठन उत्पादन को नियंत्रित करके वैश्विक आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करते हैं।

क्यों जरूरी है ‘एनर्जी सिक्योरिटी’?

क्योंकि कई उद्योग और देश तेल पर निर्भर हैं, इसलिए सरकारें ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ यानी स्थिर और सस्ती ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर देती हैं।

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