गौतम अदाणी को ट्रंप के US ने क्यों किया टारगेट, हिंडनबर्ग से लेकर SEC और WSJ तक

गौतम अदाणी के पीछे अमेरिका हाथ धोकर पड़ गया है। ऐसा हम नहीं बल्कि, आए साल अमेरिकी फर्म या फिर वहां की सरकारी संस्थाएं आरोप लगा रही हैं। इन आरोपों से तो यही साबित हो रहा है। अब वॉल स्ट्रीट जर्नल का मुद्दा सुर्खियों में हैं। दरअसल, इस अखबार ने पिछले साल जून में गौतम अदाणी को लेकर एक खबर छापी थी, जिसमें अदाणी ग्रुप के ऊपर आरोप लगाए गए थे। अब उसी आरोपों पर अदाणी एंटरप्राइजेज ने एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी देते हुए कहा कि वह इस मामले में अमेरिका के फॉरेन एसेट्स ऑफिस से बातचीत कर रही है।

अदाणी एंटरप्राइजेज ने कहा कि उसे 4 फरवरी को फॉरेन एसेट्स ऑफिस से जानकारी के लिए एक रिक्वेस्ट मिली थी। उसने कहा, “इस कम्युनिकेशन में किसी भी तरह की गड़बड़ी या नियमों का पालन न करने की बात नहीं है।”

जून 2025 की वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि गौतम अदाणी ने विदेशी रिश्वत के आरोपों को हटाने के लिए U.S. दखल की मांग की। अखबार ने छापा था कि क्या अदाणी की कंपनियों ने मुंद्रा पोर्ट के जरिए ईरानी LPG इंपोर्ट करके बैन तोड़े हैं। अदाणी ग्रुप अब U.S. ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स (OFAC) के साथ बातचीत कर रहा है। ऐसा पहला मामला नहीं जब अमेरिका में अदाणी ग्रुप के ऊपर आरोप लगे हैं। आइए उन प्रमुख आरोपों के बारे में जानते हैं जो अमेरिकी संस्थाओं ने अदाणी ग्रुप के ऊपर लगाए थे।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका जानबूझकर भारत के अरबपति गौतम अदाणी को टारगेट कर रखा है? या फिर आरोप लगाकर वह अदाणी ग्रुप को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है?

अमेरिकी संस्थाओं द्वारा अदाणी ग्रुप पर लगाए गए प्रमुख आरोप
हिंडनबर्ग ने अदाणी ग्रुप पर लगाए थे स्टॉक में हेरफेर करने के आरोप
US SEC ने फ्रॉड करने का आरोप लगाया
WSJ ने रिश्वत के आरोपों को हटाने को लेकर खबर छापी

हिंडनबर्ग के आरोप
ये तीन ऐसे आरोप हैं जो अदाणी ग्रुप पर लगाए गए। पहला आरोप जनवरी 2023 में बंद हो चुकी हिंडनबर्ग रिसर्च नाम की एक फर्म ने लगाया था। जनवरी 2023 में अमेरिका की रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने अदाणी ग्रुप पर एक रिपोर्ट छापकर पूरी दुनिया में खलबली मचा दी थी। उसने आरोप लगाए थे कि अदाणी ग्रुप ने कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी ठगी की है। फर्म ने खुलेआम स्टॉक में हेरफेर, अकाउंटिंग फ्रॉड और एसेट वैल्यू और कर्ज बढ़ाने के लिए ऑफशोर शेल एनटीटी का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में मार्केट वैल्यू में $100B से ज्यादा की कमी बताई गई था।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद गौतम अदाणी के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। रिपोर्ट आने के कुछ ही दिनों में अदाणी ग्रुप के स्टॉक्स की मार्केट वैल्यू $100 बिलियन से ज्यादा गिरी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि अदाणी ग्रुप पर मार्केट रेगुलेटर की जांच के अलावा कोई और जांच नहीं होगी, जिससे ग्रुप को बड़ी राहत मिली। इसके बाद सेबी ने इस मामले में अदाणी ग्रुप को क्लीन चिट दी थी।

US SEC के आरोप
2023 में हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद 24 में अमेरिकी की सरकारी एजेंसी ने अदाणी ग्रुप पर रिश्वत देकर कॉन्ट्रैक्ट जीतने का आरोप लगाया। US SEC ने नवंबर 2024 में गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी और अडानी ग्रीन के अधिकारियों के खिलाफ ऑफिशियली सिविल फ्रॉड के चार्ज फाइल किए थे।

अमेरिकी सिक्योरिटी एक्सचेंज कमीशन ने इन्वेस्टर्स को गलत स्टेटमेंट देकर सोलर कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया। इस केस में $250M से ज्यादा की कथित रिश्वत शामिल है, जिसके साथ अलग-अलग फेडरल क्रिमिनल चार्ज भी चल रहे हैं।

इस मामले में US SEC भारत सरकार को बायपास करके गौतम अदाणी को सीधे समन भेजना चाहती है। इसके लिए उसने अमेरिकी अदालत में याचिका भी दायर की है। हालांकि, गौतम अदाणी ने वकील करके बातचीत करके को कहा था।

WSJ ने अदाणी के खिलाफ लगाए आरोप
अभी गौतम अदाणी के खिलाफ दो आरोप लगे ही थे कि जून 2025 में अमेरिका के अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल ने भी रही कही कसर पूरी कर दी। अखबार ने एक खबर छापकर आरोप लगाया कि गौतम अदाणी अपने खिलाफ विदेशी रिश्वत के चार्ज हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

अखबार ने लिखा था- “एशिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी गौतम अडानी, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन से अपने खिलाफ विदेशी रिश्वत के चार्ज हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बजाय, उन्हें प्रॉसिक्यूटर के साथ अपनी लड़ाई में एक नए मोर्चे का सामना करना पड़ रहा है: इस बात की जांच कि क्या उनकी कंपनियां ईरानी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट खरीद रही हैं।”

ये तीनों आरोप अलग-अलग साल लगाए गए हैं। 2023 में हिंडबर्ग ने लगाए थे। 2024 में अमेरिकी सिक्योरिटी एक्सचेंज कमीशन ने और 2025 में WSJ ने एक रिपोर्ट छापकर लगाया था।

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