आपके आस-पास भी हैं बात-बात पर खुद को ‘बेचारा’ दिखाने वाले लोग?

मनोविज्ञान में इसे ‘विक्टिम मेंटालिटी’ कहते हैं। शुरुआत में हमें उन पर दया आती है, लेकिन धीरे-धीरे उनकी ये आदत आपकी सारी पॉजिटिव एनर्जी चूस लेती है। अगर आप भी ऐसे लोगों से परेशान हैं, तो लड़ने या बहस करने की जगह इन 5 स्मार्ट तरीकों से उन्हें हैंडल कर सकते हैं।
भावनाओं में बहने से बचें
जब वो अपना दुखड़ा रोना शुरू करें, तो सुनें जरूर, लेकिन उनकी भावनाओं में बहें नहीं। अगर आप भी उनके साथ “हां यार, तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ” करने लगेंगे, तो उन्हें और बढ़ावा मिलेगा। इसके बजाय न्यूट्रल रहें। “मैं समझ सकता हूं कि यह मुश्किल है”- बस इतना कहना काफी है। ज्यादा भावुक होकर उन्हें यह महसूस न कराएं कि उनका ‘बेचारा’ बनना सही है।
समस्या नहीं, समाधान पर बात करें
यह सबसे कारगर तरीका है। विक्टिम कार्ड खेलने वाले लोग सिर्फ समस्या पर बात करना चाहते हैं, समाधान पर नहीं। जब वो शिकायत करें, तो आप उनसे सीधा सवाल पूछें- “हम्म, यह तो बुरा है, अब इसे ठीक करने के लिए तुमने क्या सोचा है?” जैसे ही आप ‘हल’ की बात करेंगे, उनका ध्यान शिकायत से हटकर जिम्मेदारी पर जाएगा, जो उन्हें अक्सर पसंद नहीं आता और वो चुप हो सकते हैं।
अपनी सीमाएं तय करें
ऐसे लोग आपका घंटों समय बर्बाद कर सकते हैं। आपको अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। अगर वो अपनी राम-कथा शुरू करें, तो आप पहले ही कह दें, “मेरे पास बात करने के लिए अभी सिर्फ 5 मिनट हैं, उसके बाद मुझे एक जरूरी काम है।” जब आप समय की सीमा लगा देते हैं, तो वो अपनी निगेटिविटी पूरी तरह आप पर नहीं थोप पाते।
‘सुपरहीरो’ बनने की न करें कोशिश
हम अक्सर गलती करते हैं कि उनका दुख देखकर उनकी मदद करने या उनकी समस्या सुलझाने दौड़ पड़ते हैं। याद रखिए, जो इंसान आदत से मजबूर है, आप उसकी एक मुसीबत सुलझाएंगे, वो कल दो नई मुसीबतें लेकर आएगा। उनकी लड़ाई उन्हें खुद लड़ने दें। आप सिर्फ गाइड कर सकते हैं, उनका बोझ अपने कंधे पर न उठाएं।
अपने एनर्जी को रखें सुरक्षित
ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से आप खुद को थका हुआ और निगेटिव महसूस कर सकते हैं। इसे ‘एनर्जी ड्रेन’ कहते हैं। जब भी आप उनसे मिलें, उसके बाद कुछ ऐसा करें जो आपको खुशी देता हो- जैसे अच्छा संगीत सुनना या वॉक पर जाना। मानसिक दूरी बनाकर रखें और उनकी बातों को दिल पर न लें।
ध्यान रहे, मदद मांगना और हमेशा खुद को लाचार दिखाना- इन दोनों में फर्क है। जो लोग वाकई परेशान हैं, उनका साथ दें, लेकिन जो इसे आदत बना चुके हैं, उनसे थोड़ी दूरी भली है।





