हाईकोर्ट ने अवैध गिरफ्तारी के मामले में एसएचओ और विवेचक को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ललितपुर के एक आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कहा कि यदि याची के आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है, जो दर्शाता है कि पुलिस को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेशों का भी सम्मान नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ललितपुर के एक आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कहा कि यदि याची के आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है, जो दर्शाता है कि पुलिस को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेशों का भी सम्मान नहीं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने सानू राशिद की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची की ओर से अधिवक्ता विजित सक्सेना ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय न तो गिरफ्तारी के आधार बताए गए और न ही विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया। याची को 14 सितंबर 2025 को उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि औपचारिक गिरफ्तारी नहीं दिखाई गई।

इस संबंध में याची की बहन ने 16 सितंबर 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ललितपुर के समक्ष अवैध गिरफ्तारी की शिकायत दर्ज कराई। संबंधित थाने के सीसीटीवी फुटेज तलब करने की मांग की। सीजेएम ने 22 सितंबर 2025 को विवेचक को रिपोर्ट व सीसीटीवी फुटेज पेश करने का निर्देश दिया, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। इसके बाद 30 सितंबर और फिर तीन नवंबर 2025 को भी सीजेएम ने दोबारा आदेश जारी किए और सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले का हवाला देते हुए पुलिस थानों में सीसीटीवी होने की अनिवार्यता की याद दिलाई।

हाईकोर्ट ने कहा कि अब तक सीजेएम के आदेशों का पालन न किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने कोतवाली थाना, ललितपुर के एसएचओ और मामले के विवेचक को 14 सितंबर 2025 की सीसीटीवी फुटेज के साथ अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

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