शक और ओवर-थिंकिंग आपके रिश्ते को खत्म तो नहीं कर रहे?

रिलेशनशिप एंग्जाइटी एक ऐसी स्थिति है, जहां व्यक्ति अपने रिश्ते को लेकर लगातार असुरक्षित, स्ट्रेस या दुखी महसूस करता है।

रिश्ते को लेकर कभी-कभार फिक्रमंद होना नॉर्मल है, लेकिन जब यह चिंता आपके मानसिक सुकून को छीन ले और रिश्ते में दरार पैदा करने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। आइए जानें कैसे पहचानें आप रिलेशनशिप एंग्जायटी का शिकार हैं और इसे कैसे मैनेज कर सकते हैं।

रिलेशनशिप एंग्जाइटी के लक्षण
लगातार असुरक्षा- यह डर सताना कि आपका पार्टनर आपको छोड़ देगा या वह अब आपसे प्यार नहीं करता।
ओवर-थिंकिंग- पार्टनर के मैसेज का जवाब देर से आने पर यह मान लेना कि वे आपसे नाराज हैं या किसी और के साथ हैं।
बार-बार आश्वासन मांगना- पार्टनर से बार-बार पूछना, ‘क्या तुम वाकई मुझसे प्यार करते हो?’ या ‘तुम मुझे छोड़ोगे तो नहीं?’ ये रिलेशनशिप में इनसेक्योरिटी को दिखाता है।
खुद को बदलना- पार्टनर को खुश करने के लिए अपनी पसंद और पर्सनैलिटी को पूरी तरह दबा देना।
पार्टनर की जासूसी- उनके फोन, सोशल मीडिया या हर एक्टिविटी पर शक की नजर रखना।

क्यों होती है रिलेशनशिप एंग्जायटी?
पुराने एक्सपीरिएंस- अगर पिछले रिश्ते में धोखा मिला हो, तो नए रिश्ते में भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।
बचपन के अनुभव- अगर बचपन में माता-पिता से प्यार या सुरक्षा नहीं मिली, तो व्यक्ति बड़े होकर अपने रोमांटिक रिश्तों में हमेशा प्यार और सिक्योरिटी ढूंढ़ता रहता है।
कम आत्मविश्वास- जब आप खुद को प्यार के काबिल नहीं समझते, तो आपको लगता है कि पार्टनर कभी भी आपको छोड़ सकता है।

रिलेशनशिप एंग्जाइटी से कैसे डील करें?
अपनी भावनाओं को स्वीकार करें- सबसे पहले यह पहचानें कि आपको एंग्जाइटी हो रही है। अपनी घबराहट को दबाने के बजाय उसे स्वीकार करें। जब आप यह समझ जाते हैं कि यह आपके विचार हैं, हकीकत नहीं, तो आधी समस्या वहीं हल हो जाती है।
खुलकर बात करें- पार्टनर से मन की बात कहें। उन्हें आरोप लगाने के बजाय अपने इमोशन्स बताएं। जैसे जब तुम बिना बताए देर से आते हो, तो मुझे घबराहट होती है, न कि तुम हमेशा मुझे अनदेखा करते हो। इससे आपका पार्टनर बिना डिफेंसिव हुए आपकी बात सुनता है।
खुद पर ध्यान दें- अपनी पूरी दुनिया पार्टनर के इर्द-गिर्द न बुनें। अपनी हॉबी, दोस्तों और करियर पर ध्यान दें। जब आप अपनी लाइफ में खुश रहेंगे, तो रिश्ते पर आपकी निर्भरता और उससे होने वाली एंग्जाइटी कम होगी।
माइंडफुलनेस की प्रैक्टिस- एंग्जाइटी अक्सर भविष्य के डर से पैदा होती है। वर्तमान में जीना सीखें। मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की तकनीकें आपके दिमाग को शांत रखने में मदद करेंगी।
प्रोफेशनल मदद लें- अगर एंग्जाइटी आपके कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करने में संकोच न करें। थेरेपी आपको आपके डर की जड़ तक पहुंचने में मदद करती है।

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