मामूली समझकर अनदेखा कर रहे हैं कैंसर के शुरुआती संकेत? 

 कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके नाम मात्र से मन में डर पैदा हो जाता है। लेकिन कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि उसे समय रहते पहचानने की जरूरत है। अक्सर कैंसर के शुरुआती संकेत इतने सामान्य होते हैं कि हम उन्हें रोजमर्रा की थकान, मौसम के बदलाव या साधारण इन्फेक्शन समझकर टाल देते हैं। 

लेकिन यही गलती बाद में गंभीर संकट बन जाती है। कैंसर के शुरुआती संकेतों को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, उसका इलाज सफल होने की संभावना उतनी ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए इस विश्व कैंसर दिवस के मौके पर आइए जानते हैं इस बीमारी के शुरुआती लक्षण कैसे होते हैं।

अकारण वजन कम होना
बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के अगर अचानक 4-5 किलो वजन कम हो जाए, तो यह खुशी की नहीं बल्कि चिंता की बात है। पैनक्रियाज, पेट या फेफड़ों के कैंसर में वजन का अचानक गिरना एक अहम लक्षण हो सकता है। शरीर जब कैंसर सेल्स से लड़ता है, तो वह अपनी एनर्जी बहुत तेजी से खर्च करता है, जिससे वजन घटने लगता है।

लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान
काम के बाद थकान होना सामान्य है, लेकिन अगर भरपूर नींद और आराम के बाद भी आप बेहद सुस्ती महसूस करते हैं, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। ब्लड कैंसर या कोलन कैंसर में इंटरनल ब्लीडिंग के कारण शरीर में कमजोरी और थकान बनी रहती है।

त्वचा और शरीर में बदलाव
त्वचा पर कोई नया तिल निकलना या पुराने तिल के रंग और आकार में बदलाव होना स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, शरीर के किसी भी हिस्से खासकर महिलाओं में ब्रेस्ट में महसूस होने वाली कोई भी बिना दर्द वाली गांठ सबसे खतरनाक होती है। अक्सर लोग दर्द न होने के कारण गांठ को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कैंसर की गांठें शुरुआती दौर में दर्द नहीं होता।

पाचन और पेट से जुड़ी समस्याएं
लगातार कब्ज, दस्त, या मल के रंग में बदलाव को लोग अक्सर खान-पान की गड़बड़ी मान लेते हैं। लेकिन अगर ये समस्याएं हफ्तों तक बनी रहें या मल के साथ खून आए, तो यह कोलन कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसी तरह, खाना निगलने में लगातार कठिनाई होना गले या इसोफेगस के कैंसर की ओर इशारा करता है।

लगातार खांसी और आवाज में भारीपन
अगर आपकी खांसी 3-4 हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी हुई है और दवाओं से ठीक नहीं हो रही, तो यह फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है। आवाज का अचानक बैठ जाना या भारीपन आना भी गले के कैंसर की चेतावनी हो सकती है, जिसे लोग अक्सर गला खराब’ समझकर छोड़ देते हैं।

क्यों जरूरी है समय पर जांच?
कैंसर की पहली स्टेज में इलाज की सफलता दर काफी ज्यादा होती है। लेकिन जब हम लक्षणों को इग्नोर करते हैं, तो यह बीमारी दूसरे अंगों तक फैल जाती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।

डॉक्टर की सलाह कब लें?
अगर शरीर में कोई भी बदलाव 2-3 हफ्ते से ज्यादा बना रहे।
अगर बिना किसी चोट के कहीं से ब्लीडिंग हो रही हो।
अगर आपको रात में अचानक बहुत ज्यादा पसीना आने लगे।

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