अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों के खिलाफ IIT बॉम्बे की बड़ी पहल

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बांबे के बायोइंजीनियरों की एक टीम ने नए स्मार्ट प्लेटफार्म ब्रेनप्रोट व ड्रगप्रोटएआइ विकसित किया है, जो बिखरे हुए मस्तिष्क के रोगों के डाटा को एकीकृत करते हैं ताकि शोधकर्ता मार्कर खोज सकें, उपचारों का अन्वेषण कर सकें और दवा के लक्ष्यों को पहचान सकें । ये प्लेटफार्म मस्तिष्क से जुड़ी अलग- अलग बीमारियों के बिखरे डाटा को एक जगह लाकर मदद करेंगे। इससे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों को समझने में मदद मिलेगी।

ब्रेनप्रोट वी 3.0 एक डेटाबेस है जो विभिन्न प्रकार के जैविक डाटा जीन से लेकर प्रोटीन तक को एकल प्लेटफार्म संयोजित करता है, जिससे स्वस्थ और रोगग्रस्त दोनों स्थितियों में मस्तिष्क के काम में व्यवस्थित अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। यह पहला सिस्टम है जो जीनोमिक्स, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स, प्रोटिओमिक्स बायोमार्कर अनुसंधान से मल्टी डिजीज डेटा व मल्टी डेटाबेस जानकारी को एक पोर्टल में एकीकृत करता है।

बताएगा कितनी उपयुक्त है प्रोटीन की दवा 

डॉ. अंकित हल्दर ने कहा कि ड्रगप्रोटएआइ यह भविष्यवाणी करता है कि क्या प्रोटीन दवा के लिए उपयुक्त है। प्रोटीन के अनुक्रम से परे देख सकते हैं जैसे कि सेलुलर स्थान, संरचनात्मक विशेषताएं और अन्य अद्वितीय विशेषताएं । यह उपकरण “ड्रग्गेबिलिटी इंडेक्स” पैदा करता है। यह एक संभावना स्कोर है जो यह दर्शाता है कि किसी प्रोटीन की दवा के लिए उपयुक्त होने की कितनी संभावना है। उच्च स्कोर यह सुझाव देता है कि प्रोटीन उन प्रोटीनों के साथ कई गुण साझा करता है, जिनके लिए पहले से अनुमोदित दवाएं हैं।

प्रोटीन दवा के लिए कितना सही?

ड्रगप्रोटएआइ को यह समझने के लिए विकसित किया गया कि क्या कोई प्रोटीन दवा के लिए उपयुक्त हो सकता है (जिसमें उपयोगी दवा लक्ष्य बनने के लिए आवश्यक जैविक और भौतिक विशेषताएं होती हैं) या इससे पहले कि महंगे प्रयोग किए जाएं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में केवल लगभग 10 प्रतिशत मानव प्रोटीनों के लिए एफडीए द्वारा अनुमोदित दवा है, प्रतीकात्मक जबकि 3-4 प्रतिशत अन्य जांच के अधीन हैं।

रोग मार्कर की पहचान

हल्दर ने कहा कि ड्रगप्रोटएआइ को सीधे ब्रेनप्रोट में एकीकृत करके हमने एक पाइपलाइन बनाई है, जहां शोधकर्ता एक रोग मार्कर की पहचान से लेकर उसकी एक्सप्रेशन पैटर्न की जांच करने उसकी दवा के लिए उपयुक्तता का मूल्यांकन करने और मौजूदा यौगिकों या क्लिनिकल परीक्षणों का अन्वेषण करने तक सभी एक घंटे के भीतर आगे बढ़ सकते हैं।

जीन्स और प्रोटीन की जांच

आईआईटी बांबे के बायोसाइंसेस और बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि ब्रेनप्रोट में मानव मस्तिष्क के 20 न्यूरोएनाटामिकल क्षेत्रों में बाएं व दाएं बाएं और दाएं हिस्सों (हेमस्फियर) के बीच प्रोटीन एक्सप्रेशन के अंतर को पहचानने और समझने के लिए संसाधन भी शामिल हैं। यह अपनी तरह का पहला संसाधन है। ब्रेनप्रोट में 56 मानव मस्तिष्क रोगों और 1,800 से अधिक रोगी नमूनों से मिले 52 मल्टी ओमिक्स डाटासेट का डाटा शामिल है। इन डाटासेट में 11 रोगों के लिए ट्रांसक्रिप्टोमिक डेटा और छह रोगों के लिए प्रोटिओमिक डेटा शामिल हैं।

प्रत्येक रोग के लिए उपयोगकर्ता उन जीनों और प्रोटीनों की जांच कर सकते हैं जो रोग से अक्सर जुड़े होते हैं। यह आकलन कर सकते हैं कि ये जीन और प्रोटीन मौजूदा चिकित्सा और वैज्ञानिक डाटाबेस द्वारा कितनी मजबूती से समर्थित हैं।

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