जयपुर में महाराजा एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश नाकाम, ट्रैक पर रखे लोहे के एंगल

जयपुर में विदेशी पर्यटकों से भरी महाराजा एक्सप्रेस को डिरेल करने की साजिश समय रहते नाकाम हो गई। अज्ञात लोगों ने सांगानेर-शिवदासपुरा के बीच रेलवे ट्रैक पर 4–5 लोहे के एंगल रख दिए थे। लोको पायलट की सतर्कता से ट्रेन रोक ली गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आरपीएफ ने शिवदासपुरा थाने में मामला दर्ज कर डॉग स्क्वॉयड के साथ जांच शुरू कर दी है।

विदेशी पर्यटकों से भरी लग्जरी महाराजा एक्सप्रेस को जयपुर में पलटाने की साजिश समय रहते नाकाम हो गई। अज्ञात लोगों ने रेलवे ट्रैक पर लोहे के एंगल रख दिए थे, लेकिन लोको पायलट की सतर्कता से ट्रेन को समय रहते रोक लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना सोमवार रात करीब 11 बजे महात्मा गांधी हॉस्पिटल स्थित रेलवे फाटक के पास सांगानेर-शिवदासपुरा स्टेशन के बीच हुई। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के सीनियर डीएससी ओंकार सिंह ने बताया कि 00240 महाराजा एक्सप्रेस सवाईमाधोपुर से जयपुर के दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन की ओर जा रही थी। रात 11.02 बजे ट्रेन का इंजन ट्रैक पर रखे 4 से 5 लोहे के एंगलों से टकरा गया। स्थिति को भांपते हुए लोको पायलट ने तुरंत ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी और कंट्रोल रूम को सूचना दी।

सूचना मिलते ही आरपीएफ की टीम डॉग स्क्वॉयड और स्पेशल फोर्स के साथ मौके पर पहुंची। ट्रैक से लोहे के एंगल हटाए गए। जांच में सामने आया कि एंगलों पर कंक्रीट के ब्लॉक लगे हुए थे, जिससे उनका वजन काफी ज्यादा था। यदि ट्रेन तेज गति से इनसे टकराती तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।

डीएससी ओंकार सिंह ने बताया कि शिवदासपुरा थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ जानबूझकर ट्रेन को डिरेल करने की साजिश के तहत मामला दर्ज कराया गया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि किसी नशेड़ी व्यक्ति ने लोहे के एंगल कंक्रीट ब्लॉक तोड़ने के उद्देश्य से पटरी पर रखे हों। दो कंक्रीट ब्लॉक टूटे हुए भी मिले हैं। संभव है कि इसी दौरान ट्रेन आ जाने से आरोपी एंगल वहीं छोड़कर भाग गए। घटना के कारण महाराजा एक्सप्रेस करीब 35 मिनट तक ट्रैक पर रुकी रही। इस 23 कोच वाली लग्जरी ट्रेन में 21 विदेशी पर्यटक सहित ट्रेन का स्टाफ सवार था। ट्रेन दिल्ली से आगरा होते हुए सवाईमाधोपुर पहुंची थी और वहां से जयपुर के दुर्गापुरा स्टेशन आ रही थी। आरपीएफ और स्थानीय पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है ताकि साजिश के पीछे शामिल लोगों का पता लगाया जा सके।

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