इन 3 ‘फालतू’ वजहों से अपनी बेटी पर न बनाएं शादी का दबाव

क्या आप उसकी शादी इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि उसे किसी से ‘प्यार’ हो गया है या फिर सिर्फ इसलिए कि वह दिन भर फोन से चिपकी रहती है?

अक्सर माता-पिता ‘बदनामी के डर’ या ‘परिवार के दबाव’ में आकर अपनी बेटियों को घर से विदा करने का फैसला ले लेते हैं, लेकिन क्या यह वाकई उसकी भलाई के लिए है, या आप सिर्फ एक जिम्मेदारी से पीछा छुड़ा रहे हैं?

यह आर्टिकल आपकी आंखें खोल देगा। यहां हम रुजुता दिवेकर की मदद से उन 3 ‘बेकार’ वजहों (Wrong Reasons To Get Married) के बारे में बात करेंगे जिनके कारण आपको बेटी की शादी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। साथ ही, आपको बताएंगे कि एक लड़की असल में शादी के लिए कब ‘क्वालीफाई’ होती है।

इन 3 कारणों से कभी न कराएं शादी
“मेरी बेटी को किसी से प्यार हो गया है”
अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि बेटी को प्यार हो गया है, तो इससे पहले कि परिवार की बदनामी हो, उसकी शादी कर दी जाए। यह सोच पूरी तरह गलत है। 18 से 21 साल की उम्र में प्यार होना स्वाभाविक है। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर वह अपनी जवानी में प्यार का अनुभव नहीं करेगी, तो कब करेगी? बुढ़ापे में तो यह संभव नहीं है।

इसलिए, उसे प्यार का अनुभव करने दें, लेकिन उसे अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक भी करें। उसे समझाएं कि वह अपना समय बर्बाद न करे और अपनी शिक्षा और करियर पर ध्यान दे। कुल मिलाकर, प्यार की वजह से शादी थोपना सही नहीं है।

“सास और पति का दबाव है”
दूसरा सबसे आम और गलत कारण यह है कि आपके पति या सास आप पर दबाव डाल रहे हैं कि बेटी की शादी कर दो। आपको उन्हें साफ शब्दों में कहना चाहिए कि वे अपना समय बिताने के लिए कोई और ‘टाइम पास’ ढूंढ लें। सिर्फ इसलिए कि उनके दिमाग में शादी की बात चल रही है, इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी बेटी इसके लिए तैयार है। रुजुता दिवेकर कहती हैं कि जब तक बेटी तैयार न हो, दूसरों के कहने पर यह फैसला न लें।

“वह पूरा दिन फोन पर लगी रहती है”
कई माता-पिता सोचते हैं कि बेटी दिन भर फोन पर रहती है, इसलिए उसकी शादी करके उसे घर से विदा कर देना चाहिए ताकि यह आदत न देखनी पड़े। रुजुता दिवेकर की मानें, तो यह माता-पिता का जिम्मेदारी से भागना है। वे कहती हैं कि अगर बेटी फोन ज्यादा चलाती है, तो यह पेरेंट्स का कर्तव्य है कि उसे समझाएं।

घर में ‘स्क्रीन जोन’ बनाएं और फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाएं। उसे बताएं कि फोन का डिजाइन ही ऐसा है कि इसकी लत लग जाती है। उसे शादी के बंधन में बांधने के बजाय पढ़ाई, करियर और सेहत पर फोकस करना सिखाएं।

शादी के लिए ये हैं 3 सही योग्यताएं
रुजुता दिवेकर के मुताबिक, आपको अपनी बेटी की शादी के बारे में तभी सोचना चाहिए जब वह इन तीन पैमानों पर खरी उतरे:

पढ़ाई पूरी हो चुकी हो: सबसे पहली शर्त यह है कि उसकी शिक्षा पूरी तरह से खत्म हो गई हो।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो: वह न केवल पैसे कमाती हो, बल्कि उसके पास जॉब और आय की गारंटी भी हो। इसका मतलब है कि अगर बाजार में मंदी आए या AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की वजह से नौकरियां जाएं, तो भी वह अपना ख्याल रख सके। उसे इतना काबिल होना चाहिए कि वह अपनी और अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठा सके।
वह समझदार हो गई हो: समझदार होने का मतलब है कि उसे स्पष्ट पता हो कि उसे अपनी जिंदगी से क्या चाहिए। उसे अपने भविष्य के पति और अपने करियर से क्या उम्मीदें हैं, यह उसे मालूम होना चाहिए।

रुजुता दिवेकर का कहना है कि अपनी बेटियों को चैन की सांस लेने दें और एक सुकून भरी जिंदगी जीने दें। जब वे ऊपर बताई गई तीनों योग्यताओं को पूरा कर लें, तभी उनसे पूछें कि क्या वे शादी करना चाहती हैं और अगर उनका जवाब “ना” हो, तो उनकी बात सुनें और उन पर दबाव न डालें।

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