बदलती लाइफस्टाइल से कमजोर हो रही हैं आंतें, हर चौथा वयस्क है कब्ज से परेशान

कब्ज को केवल पेट साफ न होने की समस्या मानना बड़ी भूल साबित हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार कब्ज का सीधा संबंध आंतों के स्वास्थ्य से है। बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान, शिथिलता, तनाव व अनियमित दिनचर्या ने आंतों को कमजोर कर दिया है, इससे कब्ज की समस्या बढ़ रही है। कन अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है।

जीवनशैली है बड़ा कारण
उपलब्ध अध्ययनों के अनुसार 22 प्रतिशत वयस्क कब्ज से प्रभावित हैं जबकि बच्चों में वह आंकड़ा 29.6 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की नियंत्रित करते हैं। जब लगातार फास्ट फूड, फाइबर जीवनशैली एक जैसी नहीं होती, की कमी वाला भोजन, अनियमित समय पर खाना इसलिए कब्ज के कारण और और तनाव के कारण इन बैक्टीरिया का संतुलन समाधान भी हर आयु वर्ग में बिगड़ता है तो आंतों को गति धीमी पड़ जाती है।

अलग-अलग हैं। सामान्य सुझाव को स्थिति धीरे-धीरे करून में बदल जाती है। सभी पर लागू करना प्रभावी नहीं कब्ज ले सकती है बीमारी का रूप संजय होता। एसजीपीजीआइ के विशेषज्ञों गांधी पीजीआइ में आने वाले पेट के के अनुसार आंतें केवल भोजन मरीजों में यह देखा गया है कि पचाने का कार्य नहीं करतीं, बड़ी संख्या में लोग लंबे समय बल्कि शरीर की इम्युनिटी, हार्मोन संतुलन, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं।

आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (गट माइकोबायोटा) आंतों को गति को नियंत्रित करते हैं। जब लगातार फास्ट फूड, फाइबर की कमी वाला भोजन, अनियमित समय पर खाना और तनाव के कारण इन बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है, तो आंतों की गति धीमी पड़ जाती है। यह स्थिति धीरे-धीरे कब्ज में बदल जाती है।

कब्ज ले सकती है गंभीर बीमारी का रूप
संजय गांधी पीजीआई में आने वाले पेट के मरीजों में देखा गया है कि बड़ी संख्या में लोग लंबे समय से कब्ज की समस्या से कब्ज की समस्या से पंड़ित रहते हैं और समय पर इलाज न मिलने के कारण उनमें बवासीर, फिशर और अन्य जटिलताएं विकसित हो जाती हैं। कई मरीज तब अस्पताल फुंचते हैं, जब समस्या काफी गंभीर हो चुकी होती है।

आदतों में सुधार करना जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में कुछ आदतें ऐसी हैं, जो सीधे तौर पर कब्ज को बढ़ावा देती हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, मोबाइल या लैपटाप के सामने बैठकर खाना, पानी कम पीना, प्रोसेस्ट और फास्ट फूड पर अत्यधिक निर्भरता, मल त्याग की इच्छा को बार-बार रोकना, अत्यधिक तनाव और अनियमित नींद- ये सभी आंतों की प्राकृतिक लय को बिगाड़ देते हैं। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कब्ज स्थायी समस्या का रूप ले लेती है।

कामकाजी वयस्कों में कब्ज
कब्ज का सबसे बड़ा कारण है आरामतलब दिनचर्या। घंटों कुर्सी पर बैठना, मानसिक दबाव, अधिक चाय काफी, देर रात भोजन और नींद की कमी आंतों की गति धीमा कर देती है। इसलिए हर घंटे कुछ मिनट चलने, भोजन में फाइबर युक्त अनाज और सलाद शामिल करने, देर रात भोजन और शराब से परहेज करने तथा पर्याप्त नींद की सलाह दी जाती है।

बुजुर्गों में कब्ज एक चेतावनी
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर अंशुमन एल्हेस के अनुसार बुजुर्गों में कब्ज केवल उम्र का असर नहीं है। आंतों की मांसपेशियों की कमजोरी, शारीरिक सक्रियता में कमी और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट भी जिम्मेदार होते हैं। वृद्ध महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से दो से तीन गुणा अधिक पाई जाती है। बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानी के रूप में नरम और सुपाच्य भोजन, पर्याप्त तरल पदार्थ, हल्की सैर और योग को दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।

बच्चों में कब्ज: कारण और समाधान अलग
एसजीपीजीआइ के गैस्टो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार के अनुसार बच्चों में कब्ज का सबसे बड़ा कारण डाइट और दिनचर्या है। बच्चे फास्ट फूड, चिप्स, पिज्जा, नूडल्स पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं। फल-सब्जियों व फाइबर युक्त भोजन से दूरी से आंतें कमजोर होती हैं। सुबह शौच की इच्छा को रोकना, मोबाइल और टीवी के कारण खेल – कूद में कमी भी बच्चों में कब्ज को बढ़ा रही है। बच्चों को दूध के साथ फल, दलिया और घर का बना संतुलित भोजन देना चाहिए।

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