दिल्ली: सड़कों के किनारे लगेंगे क्यूआर कोड वाले साइनबोर्ड

राजधानी की सड़कों पर लगने वाले साइन बोर्ड की स्थिति अब बदलने वाली है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इसके लिए नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। जिसमें सभी नए रोड साइन बोर्डों में क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे बोर्डों की गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित होगी। हर रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड के नीचे दाएं कोने में क्यूआर कोड लगा होगा। इसे स्कैन करने पर निर्माता कंपनी का नाम, निर्माण की तारीख, इस्तेमाल की गई रिफ्लेक्टिव शीटिंग का कोड और वारंटी समेत कई जानकारियां मिल जाएंगी। अगर कोई खराबी आई तो कंपनी मुफ्त में बोर्ड बदलेगी।

अब सभी नए टेंडरों में इन मानकों को शामिल करना अनिवार्य होगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है कि रिफ्लेक्टिव शीटिंग की वारंटी अब 10 साल की होगी। इसका मतलब है कि साइन बोर्ड लगने के 10 साल तक अगर चमक कम होती है या कोई खराबी आती है, तो ठेकेदार या निर्माता को मुफ्त में बदलना पड़ेगा। विभाग ने गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया है। रिफ्लेक्टिव शीट अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप होगी। डिजिटल प्रिंटिंग के बाद भी रंगों की चमक कम से कम 70 फीसदी बनी रहनी चाहिए। सबसे खास बात यह है कि 10 साल की वारंटी अवधि में हर तिमाही रिफ्लेक्टोमीटर से चमक की जांच होगी।

अगर चमक कम हुई तो ठेकेदार को तुरंत बदलाव करना पड़ेगा। इसके लिए ठेकेदारों पर सख्ती भी बढ़ाई गई है। गौरतलब है कि साल 2024 में सड़क परिवहन मंत्रालय के ऑडिट में पता चला था कि राजधानी में अलग-अलग एजेंसियों की वजह से साइन बोर्डों का आकार, रंग और डिजाइन एकसमान नहीं था। इससे ड्राइवरों को परेशानी होती थी और सुरक्षा जोखिम बढ़ता था। अब पीडब्ल्यूडी ने सभी टेंडरों में क्यूआर कोड की शर्त शामिल करना अनिवार्य कर दिया है।

खराबी पर की जा सकेगी शिकायत
अधिकारियों ने बताया कि अब इन क्यूआर कोड को पीडब्ल्यूडी सेवा मोबाइल ऐप से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।  पहले चरण में सिर्फ जानकारी मिलेगी। आने वाले दिनों में लोग इन कोड को स्कैन करके सड़क, गड्ढे, स्ट्रीट लाइट या साइन बोर्ड से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज कर सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा और त्वरित सहायता को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हर 500 मीटर पर हेल्पलाइन साइनबोर्ड लगाए जा रहे हैं। सभी प्रमुख सड़क जोन में स्ट्रीट हेल्पलाइन साइनबोर्ड अनिवार्य किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को तुरंत सहायता मिल सके।

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